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Home झारखण्ड गिरिडीह Giridih News :विराम में ही वास्तविक आराम छिपा है : मुनि श्री प्रमाण सागर

Giridih News :विराम में ही वास्तविक आराम छिपा है : मुनि श्री प्रमाण सागर

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Giridih News :विराम में ही वास्तविक आराम छिपा है : मुनि श्री प्रमाण सागर

मुनि श्री ने कहा कि विराम में ही वास्तविक आराम छिपा है. मनुष्य प्रायः अपने अशांत और बेचैन जीवन का कारण किसी व्यक्ति, वस्तु, परिस्थिति अथवा निमित्त को मानता है. वह सोचता है कि अमुक व्यक्ति उसके आराम में बाधा डाल रहा है या कोई परिस्थिति उसके सुख को छीन रही है, जबकि वास्तविक समस्या बाहर नहीं, बल्कि हमारी दृष्टि और अंतहीन दौड़ में है. उन्होंने कहा कि जब तक मन निरंतर भाग-दौड़, अधिक पाने की इच्छा और तृष्णा में उलझा रहेगा, तब तक जीवन में आराम संभव नहीं है. यदि सच्चा आराम चाहिये, तो जहां हो, जैसे हो, जितने में हो, उसमें विराम लेना सीखो. जहां विराम है, वहीं आराम है. मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य जितना अधिक प्राप्त करता है, उसकी इच्छाएं उतनी ही बढ़ती जाती हैं, इसलिए बाहरी उपलब्धियों में कभी स्थायी शांति नहीं मिल सकती. वास्तविक विश्राम भीतर है. जब मन अपनी अनंत प्यास को रोककर स्वयं में ठहरना सीखता है, तभी जीवन में सच्चा आराम प्राप्त होता है.

डिजिटल विराम

मोबाइल और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से मन अशांत हो जाता है तथा नींद और चैन समाप्त हो जाते हैं. कम से कम रात नौ बजे से सुबह आठ बजे तक मोबाइल से दूरी बनाने का अभ्यास करना चाहिए.

व्यावसायिक जीवन में विराम

आज व्यक्ति 24 घंटे काम में उलझा रहता है, जबकि जीवन केवल व्यवसाय नहीं है. निश्चित समय के बाद स्वयं को कार्य से अलग कर परिवार और स्वयं के लिए समय निकालना आवश्यक है.

व्यर्थ की बातों में विराम

व्यक्ति आजकल मतलब की बातों से कम और बिना मतलब की चर्चाओं में अधिक उलझा रहता है. व्यर्थ चर्चा मन की ऊर्जा को नष्ट करती है. इसके लिए मौन का अभ्यास अत्यंत उपयोगी है.

असंयमित भोजन पर विराम

बिना भूख के भोजन करना शरीर और मन दोनों को अस्वस्थ बनाता है. संयमित और कम भोजन जीवन में सुख और हल्कापन लाता है. मुनि श्री ने कहा कि यदि मनुष्य इन चार बातों पर विराम लगाना सीख ले, तो उसके जीवन में स्वतः आराम, शांति और संतोष का उदय होने लगेगा.

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