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हृदय नारायण सिंह हत्याकांड मामले में एक दोषी करार

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हृदय नारायण सिंह हत्याकांड मामले में एक दोषी करार

2003 से फरार चल रहा था अभियुक्त, सजा के बिंदु पर 18 जून को होगी सुनवाई

गिरिडीह.

हत्या के एक मामले में अपर जिला व सत्र न्यायाधीश प्रथम गोपाल पांडेय की अदालत ने एक व्यक्ति को दोषी करार दिया है. मामला गावां थाना क्षेत्र के डाबर गांव के सेरूआ पंचायत से जुड़ा हुआ है. मामला 13 सितंबर 1989 का है. इस मामले में सजा के बिंदु पर 18 जून को सुनवाई होगी.

जिस व्यक्ति को दोषी करार दिया गया है उसका नाम सुंदर महतो है. सुंदर महतो पर गावां के ही हृदयनारायण सिंह के हत्या का शव को माइका खदान में डालने का आरोप है. यह वर्ष 2003 से फरार चल रहा था.

यह है पूरा मामला

पूरा मामला गांवा थाना क्षेत्र के डाबर गांव के सेरुआ पंचायत से जुड़ा हुआ है. 13 सितंबर 1989 को सेरूआ गांव निवासी हृदय नारायण सिंह अपने घर में थे. इसी बीच कुछ लोग उनके घर में घुस गये और हृदयनारायण सिंह को घर से उठा कर ले गये. इसके बाद उनकी हत्या कर उनके शव को माइका खदान में डाल दिया था. इस मामले को लेकर मृतक के बेटे युवराज सिंह ने गावां थाना में लिखित आवेदन देकर 15 लोगों पर उनके पिता के हत्या कर शव को माईका खदान में डालने का आरोप लगाया था. इसके बाद करीब एक माह बाद तिसरी के एक माईका खदान से एक शव बरामद किया गया. जब शव की शिनाख्त की गयी तो वह हृदय नारायण सिंह का निकला. इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया. इसमें सीतन सिंह, साधु पासी और मधुसूदन महतो को जेल भेजा गया. मामले में अदालत ने 6 मार्च 24 को तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. वहीं चौथे फरार चल रहे आरोपी सुंदर महतो को पुलिस ने बीते 24 अप्रैल 24 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. इसके पहले भी यह जेल जा चुका था, लेकिन वर्ष 2003 में जेल से छुटने के बाद यह फरार चल रहा था. अब अदालत ने हृदयनारायण सिंह के हत्याकांड में सुंदर महतो को भी दोषी करार दिया है.

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