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Home झारखण्ड गिरिडीह Corona Effect :दूध की बिक्री प्रभावित, चारा हुआ महंगा

Corona Effect :दूध की बिक्री प्रभावित, चारा हुआ महंगा

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Corona Effect :दूध की बिक्री प्रभावित, चारा हुआ महंगा

गिरिडीह : लॉकडाउन को लेकर दुग्ध उत्पादन से जुड़े पशुपालकों को दोहरी मार सहनी पड़ रही है. वाहनों का आवागमन नहीं होने के कारण पशुचारा नहीं मिलने से चारा की कीमत कई गुना तक बढ़ गयी है, जबकि दूध का बढ़िया रेट नहीं मिल रहा है. सबसे अधिक उन पशुपालकों को परेशानी है जो शहर में आकर हलवाई के पास व मिठाई दुकानों में हर रोज दूध बेचते थे. दुकान बंद रहने से दूध की बिक्री प्रभावित हो गयी है. इस बाबत अनिल यादव कहते है कि डीसी के प्रयास से चारा का वाहन गिरिडीह पहुंच रहा है.

हालांकि कुछेक चारा विक्रेता कालाबाजारी को उतारू हैं. इससे ऊंची कीमत पर पशुपालकों को चारा खरीदना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि मिठाई दुकान बंद रहने के कारण दूध के अलावा पनीर व खोआ की भी खपत बंद हो गयी है. इस वजह से औने-पौने दामों में इसकी बिक्री की जा रही है. उन्होंने इस बाबत उपायुक्त से खटाल संचालकों के हित में कदम उठाने की मांग की है. पशुपालक साहेब यादव बताते हैं कि चुन्नी-चौकर की कीमतों में वृद्धि हुई है. जबकि दूध के दाम में बढ़ोतरी नहीं हुई है. पंचानंद यादव का कहना है कि होटल बंद है तो दूध नहीं बिक रहा है. उसके ऊपर कुट्टी का दाम बढ़ हो गया है. इसी व्यवसाय से जुड़े जयनारायण यादव व हुनू दत्ता कहते हैं मवेशियों को पालना काफी कठिन हो रहा है. दूध की बिक्री प्रभावित हुई है. पनीर भी कम कीमत में बेचना पड़ रहा है.

दूध व्यवसायियों का कहना है कि मिठाई की दुकानें बंद होने से भी दूध की खपत नहीं हो रही है. हालांकि इन परेशानियों के बावजूद पशुपालक मवेशियों की सेवा कर रहे हैं. इन्हें यह उम्मीद है कि चंद दिनों में सब कुछ ठीक हो जायेगा.बॉक्सपशुपालकों को ऋण से किया जाये मुक्त : पूर्व विधायकपूर्व विधायक लक्ष्मण स्वर्णकार ने कहा कि लॉकडाउन का जनता द्वारा पालन किया जा रहा है. लॉकडाउन की सफलता को लेकर सभी अधिकारी चुस्त व मुस्तैद हैं. कोरोना वायरस से बचाव को लेकर लॉकडाउन का अनुपालन करना सबों के लिए जरूरी है.

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श्री स्वर्णकार ने डीसी से आग्रह किया है कि पशुओं के लिए आहार, कुट्टी-चोकर आदि की व्यवस्था करायी जाये. साथ ही दुग्ध उत्पादन के लिए जो पशुपालक गाय ऋण में लिये हैं और लॉकडाउन के कारण वह दूध बेच नहीं पा रहे हैं, उन्हें ऋण से मुक्त किया जाये. सारी मिठाई की दुकानें बंद है. इस वजह से दूध की बिक्री प्रभावित है. ऐसे में पशुपालकों की परेशानी को दूर करने की जरूरत है

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