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Home झारखण्ड गिरिडीह मां बृंदवासिनी मंदिर में 81 वर्षो से हो रही चैती दुर्गा पूजा

मां बृंदवासिनी मंदिर में 81 वर्षो से हो रही चैती दुर्गा पूजा

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मां बृंदवासिनी मंदिर में 81 वर्षो से हो रही चैती दुर्गा पूजा

प्रतिमा स्थापित करते हैं ग्रामीण पूजा अर्चना

बिरनी.

बिरनी प्रखंड की पड़रिया पंचायत के बृंदा गांव के मां बृंदवासिनी मंदिर में में 81 वर्षों से चैती दुर्गा पूजा हो रही है. यहां प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की जाती है. पूजा समिति ग्रामीणों के सहयोग से भव्य मेला का आयोजन करती है. बृंदा गांव के अलावा आसपास के ग्रामीणों में मां बृंदवासिनी के प्रति गहरी आस्था है. कलश स्थापन से लेकर मेला तक भक्तों की भीड़ लगी रहती है. ग्रामीण बताते हैं कि गांव में एक बार महामारी फैली थी. महामारी फैलने के बाद गांव के ही स्व. हेमन राय ने मां दुर्गा की प्रतिमा लगाने की बात कही. प्रतिमा लगाने की बात कहने के बाद से ही पूरे गांव बीमारी दूर हो गयी. इसके बाद हेमन राय ने किसी तरह से झोपड़ी में मां की प्रतिमा स्थापित कर पूजा शुरू की. जैसे-जैसे मां के प्रति भक्तों में विश्वास बढ़ता गया, वैसे-वैसे ग्रामीण मंदिर बनाने के प्रति गंभीर हुए. ग्रामीणों के प्रयास से भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया. मंदिर के प्रवेश द्वार पर लगा बड़ा घंटा की ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है. ग्रामीणों ने बताया गया कि सच्चे मन मांगी गयी मनोकामना मां पूरी करती है. नवमी के दिन बकरे की बलि दी जाती है. दशमी में भव्य मेला लगता है. मेले में कई तरह के झूले लगाये जाते हैं. इस बार रामनवमी में बाहर के कलाकार नव दिवसीय कीर्तन व दशमी में भक्ति जागरण प्रस्तुत करेंगे. मंदिर में पंडित राजेंद्र पांडेय एवं पुजारी एतवारी साव को बनाया गया है. दोनों विधिवत तरीके से कलश स्थापना से नौ दिनों तक पूजा में भाग लेंगे. पूजा व मेला संपन्न कराने के लिए युगल साव को अध्यक्ष, केदार साव को सचिव, प्रयाग सिंह को कोषाध्यक्ष बनाया गया है. साथ ही संतोष साव, बीरेंद्र साव, पप्पू पंडित, सुरेंद्र सिंह, जगदीश साव, राजू साव, बहादुर साव, नूनमन पंडित, त्रिवेणी पंडित, महेंद्र शर्मा, भरत साव समेत अन्य ग्रामीण पूजा सफल करने जुटे हुए हैं.

बंगाल के मूर्तिकार बना रहे प्रतिमा

पुजारी एतवारी साव ने कहा कि कुम्हारटोली कोलकाता (पश्चिम बंगाल) से मूर्तिकारों प्रतिमा निर्माण में लगे हुए हैं. मां की साज सज्जा की विशेष व्यवस्था की गयी है. मंदिर के प्रवेश द्वार पर लगा 152 किलो का घंटा की मनमोहक आवाज, विशालकाय प्राचीन बरगद पेड़, नवयुवकों की सक्रियता और बुजुर्गों की गंभीरता से ही मां बृंदवासिनी मंदिर अनोखा बना हुआ है.

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