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Home झारखण्ड गढ़वा रंका सब्जी बाजार में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, गंदगी व दुर्गंध से लोग परेशान

रंका सब्जी बाजार में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, गंदगी व दुर्गंध से लोग परेशान

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रंका सब्जी बाजार में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, गंदगी व दुर्गंध से लोग परेशान

नंद कुमार, रंका एक ओर सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर साल लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं रंका प्रखंड मुख्यालय का मुख्य बाजार इस अभियान की हकीकत पर सवाल खड़े कर रहा है. रंका का सब्जी बाजार इन दिनों गंदगी और दुर्गंध का केंद्र बन गया है. यहां सब्जी विक्रेता बजबजाती नालियों के ऊपर दुकान लगाने को मजबूर हैं, जबकि ग्राहक मांस-मछली के कचरे और महुआ शराब की तीखी दुर्गंध के बीच नाक बंद कर खरीदारी कर रहे हैं. रंका बाजार पुल के समीप नदी किनारे लगने वाले इस बाजार में सब्जी, मुर्गा, मटन और मछली की दुकानों के साथ अवैध रूप से महुआ शराब की बिक्री भी होती है. मुर्गा और मछली विक्रेता अपशिष्ट, पंख और अन्य कचरा सीधे नदी में फेंक देते हैं, जिससे जल प्रदूषण बढ़ रहा है और आसपास के क्षेत्र में सड़ांध फैली रहती है. बाजार की नालियों का गंदा पानी सड़क पर बहता रहता है. ऐसे में सब्जी विक्रेता प्लास्टिक या बोरा बिछाकर अपनी दुकानें लगाते हैं. दुकानदारों से नियमित रूप से तहबाजारी की वसूली की जाती है, लेकिन साफ-सफाई की व्यवस्था लगभग नदारद है. स्थानीय ग्रामीण किशोर कुमार, उत्तम पांडेय, संजय कुमार सिन्हा, मो. गुड्डू, मुर्तजा अली और साक्षी कुमारी ने बताया कि बाजार में स्वच्छता नाम की कोई व्यवस्था नहीं है. चारों ओर महुआ शराब और मांस-मछली की बदबू फैली रहती है. इससे महिलाओं और अन्य उपभोक्ताओं को बाजार आने में परेशानी होती है. उन्होंने प्रशासन से मांस-मछली की दुकानों को मुख्य सब्जी बाजार से दूर स्थानांतरित करने की मांग की है. अतिक्रमण के कारण स्थिति बदहाल स्थानीय लोगों के अनुसार, बाजार की बदहाल स्थिति के पीछे अतिक्रमण भी एक बड़ा कारण है. बताया जाता है कि बाजार समिति की करीब चार एकड़ भूमि पर प्रभावशाली लोगों ने अतिक्रमण कर पक्के मकान और दुकानें बना ली हैं. इसके कारण बाजार के लिए उपलब्ध भूमि काफी कम हो गयी है और बची हुई जगह पर सब्जी, मांस और मछली की दुकानें एक साथ लग रही हैं. …………. एसडीओ को कई बार दिया गया आवेदन : मुखिया रंका के मुखिया रंजीत कुमार सोनी ने कहा कि सब्जी बाजार के बीच मांस और मछली की दुकानें लग रही हैं. इन्हें अलग स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी को कई बार लिखित आवेदन दिया गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर नदी और नालियों की सफाई करायी जाती है, लेकिन मांस-मछली विक्रेता फिर से कचरा नदी में फेंक देते हैं. ……………. लोगों की राय वसूली होती है, लेकिन सुविधाएं नहीं : राजेश वरिष्ठ समाजसेवी राजेश कुमार मद्धेशिया ने कहा कि बाजार समिति केवल दुकानदारों से वसूली करने और कार्रवाई करने तक सीमित है. बाजार समिति के नाम पर दुकानें संचालित हो रही हैं और नियमित रूप से शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं है. चार एकड़ बाजार भूमि को को कराया जाये अतिक्रमण मुक्त: शत्रुघ्न आरटीआई कार्यकर्ता शत्रुघ्न चौधरी ने कहा कि यदि प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाकर बाजार समिति की चार एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा दे, तो मांस-मछली और सब्जी बाजार को अलग-अलग स्थानों पर व्यवस्थित किया जा सकता है. इसके लिए ठोस प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता है.

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