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Home झारखण्ड गढ़वा जिले में तीन साल में बांटे 30 लाख गेंदा फूल के पौधे, धरातल पर योजना विफल

जिले में तीन साल में बांटे 30 लाख गेंदा फूल के पौधे, धरातल पर योजना विफल

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जिले में तीन साल में बांटे 30 लाख गेंदा फूल के पौधे, धरातल पर योजना विफल

पीयूष तिवारी, गढ़वा गढ़वा जिले में जिला उद्यान विभाग वर्षों से जिले को फूल और फलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन सफलता अब तक सीमित रही है. विभाग हर साल गुलाब, गेंदा, ग्लेडियोलस, रजनीगंधा, लेमनग्रास, जरबेरा और कार्नेशन जैसे फूलों के पौधे किसानों को नि:शुल्क उपलब्ध कराता है. हालांकि, बड़े पैमाने पर वितरण के बावजूद किसान इन पौधों की खेती नहीं कर पा रहे हैं, और अधिकांश पौधे केवल गमलों की शोभा तक सीमित रह गये हैं. गढ़वा में अब भी गेंदा और गुलाब जैसे फूलों के लिए पूजा या उत्सव के समय कोलकाता या वाराणसी से फूल मंगाने पड़ते हैं. उद्यान विभाग ने केवल तीन वर्षों (2022-23, 2023-24 और 2025-26) में गेंदा के 30,15,555 पौधे, ग्लेडियोलस के 6,62,248, रजनीगंधा के 2,02,247, गुलाब के 75,826, जरबेरा के 20,000, कार्नेशन के 14,286 और लेमनग्रास के 85,720 पौधे वितरित किये. फलों की बागवानी में भी स्थिति समान फलों के मामले में भी हालात कई हद तक निराशाजनक हैं. विभाग आम, आंवला, नींबू, अमरूद, पपिता, केला, अन्नानास, स्टॉबेरी, लिची और सपोटा के पौधे नि:शुल्क वितरित करता है. हालांकि, जिले में केवल आम की बागवानी सफल हो पायी है, जबकि अन्य फलों की खेती प्रमुख स्तर पर विकसित नहीं हो पायी. विभाग ने तीन वर्षों में पपिता के 51,307, केला के 81,185, आम के 31,802, अन्नानास के 20,000, स्टॉबेरी के 1,10,393, सपोटा के 3,310, बेर के 2,942 , लिची के 1,232, बेल के 3,872, अमरूद के 23,168, नींबू के 9,919 और आंवला के 4,768 पौधे वितरित किये हैं. देर से पौधों का वितरण होने के कारण विकसित नहीं हो पाते पौधे जिला उद्यान विभाग सालों से फूलों और फलों के पौधे किसानों को वितरित कर रहा है, लेकिन जिले में बागवानी का कल्चर अभी तक किचन गार्डन से आगे नहीं बढ़ पाया है. इसका मुख्य कारण यह है कि विभाग पौधों का वितरण हर साल बहुत देर से करता है. आमतौर पर पौधे बरसात के बाद, अक्टूबर-नवंबर में वितरित किये जाते हैं. इस वजह से अधिकतर पौधे पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो पाते। उदाहरण के तौर पर, वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर में आम और पपीते के पौधे वितरित किये गये थे, जिनमें से अधिकांश पौधे ठीक से बढ़ नहीं सके. इसके अलावा, फूलों की खेती के लिए आवश्यक संसाधन जैसे ड्रिप इरिगेशन और शेड नेट भी किसानों के पास पर्याप्त नहीं हैं. सर्दियों में फूलों को विकसित होने के लिए नहीं मिलता पर्याप्त समय : डॉ अशोक कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक और बाबू दिनेश सिंह विवि के डीन, फैक्टी ऑफ साइंस, एग्रीकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, डॉ अशोक कुमार ने बताया कि जिले में फलों और फूलों का कोई व्यवस्थित बाजार नहीं है, जो किसान छोटे पैमाने पर फूलों की खेती करते हैं, उनके फूलों को बाहर भेजा नहीं जा सकता. गढ़वा का जलवायु भी ऐसा है कि सर्दियों में फूलों को विकसित होने का पर्याप्त समय नहीं मिलता. देर से आवंटन प्राप्त होने पर वितरण में हुई थी देरी: डीएओ इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) खुशबू पासवान ने पिछले साल देर से पौधों का आवंटन प्राप्त हुआ था, जिस कारण पौधों के वितरण में देरी हुई थी.

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