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Home झारखण्ड गढ़वा गढ़वा के केतार चतुर्भुजी मंदिर में आस्था का सैलाब, विधायक अनंत प्रताप देव ने टेका मत्था

गढ़वा के केतार चतुर्भुजी मंदिर में आस्था का सैलाब, विधायक अनंत प्रताप देव ने टेका मत्था

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गढ़वा के केतार चतुर्भुजी मंदिर में आस्था का सैलाब, विधायक अनंत प्रताप देव ने टेका मत्था
गढ़वा में केतार चतुर्भुजी माता मंदिर में मां की प्रतिमा (बाएं) और हवन करते विधायक अनंत प्रताप देव. फोटो: प्रभात खबर

केतार गढ़वा से संदीप कुमार की रिपोर्ट

Garhwa Ram Navami: झारखंड के गढ़वा जिला अंतर्गत केतार प्रखंड स्थित अति प्राचीन मां चतुर्भुजी मंदिर आज रामनवमी के पावन अवसर पर भक्ति के रंग में सराबोर रहा. सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गयी . जय माता दी और जय श्री राम के उद्घोष से पूरा केतार क्षेत्र गुंजायमान हो उठा.आज के विशेष पूजनोत्सव में क्षेत्रीय विधायक अनंत प्रताप देव ने भी मां के दरबार में हाजिरी लगाई और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की. उनके साथ भारी संख्या में स्थानीय गणमान्य और दूर-दराज से आए श्रद्धालु उपस्थित थे.

आस्था का प्रमुख केंद्र: क्यों खास है यह धाम

मां चतुर्भुजी मंदिर केवल स्थानीय लोगों की श्रद्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के भक्तों के लिए एक प्रमुख शक्तिपीठ बन चुका है. चैत्र नवरात्र के दौरान यहां का माहौल किसी कुंभ से कम नहीं होता. इस धार्मिक स्थल का चमत्कारी इतिहास रहा हैं.

300 साल पुराना है मंदिर

स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास लगभग 300 वर्ष पुराना है. कहा जाता है कि सोनपुरवा स्टेट के राजा और जगजीवन बैगा को स्वप्न आने के बाद भैंसहट घाटी में खुदाई कराई गई, जहाँ से मां की दिव्य मूर्ति प्राप्त हुई.मूर्ति को हाथी पर चढ़ाकर ले जाया जा रहा था, लेकिन वर्तमान मंदिर स्थल के पास एक केंदु वृक्ष के नीचे हाथी रुक गया.इसे ईश्वरीय संकेत मानकर वहीं मूर्ति स्थापित कर दी गई, जो आज एक भव्य धाम का रूप ले चुका है.मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है. मुख्य गर्भगृह में मां काली के साथ-साथ मां लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा और गणेश जी की प्रतिमाएं विराजमान हैं.

61 किलो चांदी के श्रीयंत्र पर विराजमान हैं मां

मां की मुख्य प्रतिमा को 61 किलोग्राम चांदी से निर्मित श्रीयंत्र के आसन पर विराजमान किया गया है और ऊपर चांदी का भव्य छत्र सुशोभित है. रामनवमी के अवसर पर मंदिर परिसर में विशाल मेले का दृश्य है. बच्चों के लिए झूले, श्रृंगार सामग्री और प्रसाद की दुकानों से रौनक बढ़ गई है.

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सुरक्षा के कड़े इंतजाम

भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. हवन, विशेष आरती और विशाल भंडारे का आयोजन.बताया जाता हैं इस स्थान से श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि मां चतुर्भुजी के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता.आज रामनवमी पर भक्तों का यह हुजूम इसी अटूट आस्था की तस्दीक कर रहा है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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