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नीलामी के चार माह बाद भी नहीं खुला पोटाश ब्लॉक, छायी निराशा

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नीलामी के चार माह बाद भी नहीं खुला पोटाश ब्लॉक, छायी निराशा

विजय सिंह,भवनाथपुर कभी पलामू प्रमंडल की औद्योगिक नगरी के रूप में पहचान रखने वाला भवनाथपुर आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है. भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा चपरी पंचायत के मुस्कैनिया पहाड़ी क्षेत्र में पोटाश ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया पूरी हुए चार माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इसे शुरू नहीं किये जाने से स्थानीय लोगों में भारी निराशा है. वर्ष 2014 में घाघरा चूना पत्थर खदान के बंद होने और 16 फरवरी 2020 को तुलसीदामर डोलोमाइट खदान पर ताला लगने के बाद भवनाथपुर वीरानगी की कगार पर पहुंच गया है. रही-सही कसर सेल प्रबंधन द्वारा वर्ष 2025 में क्रशिंग प्लांट के ढांचों की नीलामी कर उसे कटवाने से पूरी हो गयी. ऐसे में मुस्कैनिया-गडेरियाडिह-बरवारी पोटाश ब्लॉक की नीलामी से क्षेत्र के फिर से गुलजार होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब यह उम्मीद धुंधली पड़ती दिख रही है. खदानों के बंद होने से क्षेत्र में बेरोजगारी और भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है. रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में युवा बाहरी राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि पोटाश ब्लॉक शुरू होने से न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलते, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता. 138.39 मिलियन टन पोटाश भंडार का अनुमान विशेषज्ञों के अनुसार मुस्कैनिया-गडेरियाडिह-बरवारी पोटाश ब्लॉक में लगभग 138.39 मिलियन टन पोटाश का भंडार होने का अनुमान है. यह भंडार न केवल झारखंड बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वर्ष 2024 में शुरू हुई नीलामी प्रक्रिया एक बार रद्द होने के बाद दोबारा शुरू की गयी थी, जिसे सफल बताया जा रहा है. इसके बावजूद खान मंत्रालय की चुप्पी ने क्षेत्र के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं. भवनाथपुर का ढहता औद्योगिक ढांचा 2014: घाघरा चूना पत्थर खदान बंद हुई. 2020: 16 फरवरी को तुलसीदामर डोलोमाइट खदान बंद हुई. 2025: क्रशिंग प्लांट के ढांचों की नीलामी और कटाई हुई. वर्तमान: बेरोजगारी और पलायन की समस्या से जूझ रहा है क्षेत्र.

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