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Home झारखण्ड गढ़वा 25 साल बाद पिता ने पुत्र को अपनाया, थाना प्रभारी की पहल से सुलझा विवाद

25 साल बाद पिता ने पुत्र को अपनाया, थाना प्रभारी की पहल से सुलझा विवाद

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25 साल बाद पिता ने पुत्र को अपनाया, थाना प्रभारी की पहल से सुलझा विवाद

भंडरिया.

भंडरिया थाना क्षेत्र के मडगड़ी (क) गांव में 25 वर्षों से चला आ रहा एक गहरा पारिवारिक विवाद आखिरकार सुखद मोड़ पर समाप्त हो गया. थाना प्रभारी सुभाष कुमार पासवान की संवेदनशीलता और पंचायत समिति सदस्य अनीता देवी की सक्रियता से एक पिता ने सार्वजनिक रूप से अपने पुत्र को स्वीकार कर लिया. इस मिलन से न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे गांव में खुशी का माहौल है.क्या है पूरा मामलाजानकारी के अनुसार, मदगड़ी निवासी शत्रुघ्न राम का विवाह आशा देवी से हुआ था. विवाह के पश्चात उन्हें एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम विकास राम है. हालांकि, पुत्र के जन्म के कुछ समय बाद ही पति-पत्नी के बीच अनबन शुरू हो गई. विवाद इतना बढ़ा कि आशा देवी अपने मायके में जाकर रहने लगीं और वहीं संघर्षों के बीच अपने पुत्र का पालन-पोषण किया.

इधर, शत्रुघ्न राम ने अपने पुत्र विकास राम को अपनी संपत्ति से पूरी तरह बेदखल कर दिया था. विकास अपने हक के लिए वर्षों तक संघर्ष करता रहा. गांव में कई बार पंचायतें और बैठकें हुईं, लेकिन शत्रुघ्न राम टस से मस नहीं हुए. हार मानकर विकास ने प्रशासन का दरवाजा खटखटाया और भंडरिया थाना प्रभारी को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी.थाने में हुई पहल, घर पर हुआ मिलनआवेदन पर त्वरित संज्ञान लेते हुए थाना प्रभारी सुभाष कुमार पासवान ने दोनों पक्षों को थाने बुलाया. गुरुवार (8 जनवरी) को थाना परिसर में हुई वार्ता के दौरान शत्रुघन राम अपनी पत्नी और पुत्र को अपनाने को तैयार हुए. इसके बाद शुक्रवार को गांव में औपचारिक रूप से पिता-पुत्र का मिलन कराया गया. इस भावुक दृश्य को देखने के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. बेटा का कहना है कि मेरे पिता लोगों के बहकावे में आकर पुश्तैनी जमीन बेच रहे थे. अगर सारी संपत्ति बिक जाती, तो मेरे बच्चों के भविष्य पर संकट आ जाता. कई बार सामाजिक बैठकों से समाधान की कोशिश की, पर सफलता नहीं मिली. प्रशासन की मदद से आज मुझे मेरा हक और परिवार मिल गया. गांव में इस मिलन की चर्चा हर तरफ है. ग्रामीणों ने थाना प्रभारी और पंचायत समिति सदस्य अनीता देवी की भूरी-भूरी प्रशंसा की है. लोगों का कहना है कि पुलिस के इस मानवीय चेहरे के कारण एक बिखरता हुआ परिवार फिर से एक हो गया.

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