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Home झारखण्ड गढ़वा गर्मी में बढ़े डॉग बाइट के मामले, पालतू पशुओं पर हमले दोगुने से अधिक

गर्मी में बढ़े डॉग बाइट के मामले, पालतू पशुओं पर हमले दोगुने से अधिक

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गर्मी में बढ़े डॉग बाइट के मामले, पालतू पशुओं पर हमले दोगुने से अधिक

पीयूष तिवारी, गढ़वा जिले में भीषण गर्मी और उमस के बीच डॉग बाइट (कुत्ते के काटने) की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. खासकर पालतू पशु कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं. बकरी, गाय, भेड़, बछड़े और सुअर जैसे पशुओं को कुत्ते हमला कर गंभीर रूप से घायल कर रहे हैं. जिला पशुपालन विभाग के जिला मॉडल अस्पताल, गढ़वा में प्रतिदिन ऐसे चार से पांच मामले पहुंच रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार मार्च महीने में कुत्तों के हमले से पालतू पशुओं के घायल होने के 58 मामले दर्ज हुए थे. अप्रैल में यह संख्या 49 रही, जबकि मई में बढ़कर 125 तक पहुंच गयी. यह आंकड़ा केवल गढ़वा जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल का है. जिले के अन्य अस्पतालों और निजी चिकित्सकों के यहां भी बड़ी संख्या में पशुओं का इलाज कराया जा रहा है. इस बीच जिला पशुपालन विभाग में एंटी-रेबीज और टिटनस इंजेक्शन की कमी बनी हुई है. इसके कारण लोगों को बाजार से दवा खरीदनी पड़ रही है. बताया जाता है कि इस बार विभाग को विभिन्न बीमारियों की दवाएं अपेक्षाकृत कम मात्रा में मिली हैं. गर्मियों में कुत्तों में बढ़ जाता है स्ट्रेस हार्मोनः डॉ रंजन गढ़वा मॉडल अस्पताल के पशु शल्य चिकित्सक डॉ रंजन कुमार झा ने बताया कि गर्मियों में कुत्तों के आक्रामक होने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. अत्यधिक गर्मी के कारण उनके शरीर में कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे वे चिड़चिड़े और तनावग्रस्त हो जाते हैं. कुत्तों को इंसानों की तरह पसीना नहीं आता. वे हांफकर और जीभ बाहर निकालकर शरीर का तापमान नियंत्रित करते हैं. अधिक गर्मी में यह प्रक्रिया पर्याप्त नहीं होती, जिससे उनका आक्रामक व्यवहार बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि पानी और भोजन की कमी भी एक बड़ा कारण है. विशेष रूप से आवारा कुत्तों को गर्मियों में पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे वे डिहाइड्रेशन का शिकार होकर हिंसक हो सकते हैं. कुत्ते के काटने पर क्या करें डॉ रंजन कुमार झा ने बताया कि कुत्ते के काटने पर मनुष्य और पशु दोनों में रेबीज व टिटनस जैसे गंभीर संक्रमण का खतरा रहता है. ऐसे में घाव को तुरंत बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए. इसके बाद बिना देर किये नजदीकी अस्पताल या चिकित्सक से संपर्क कर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए. उन्होंने बताया कि कुत्ते की लार में रेबीज वायरस मौजूद हो सकता है. इसलिए घाव को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है. अधिक कास्टिक वाले साबुन से घाव धोने पर वायरस और बैक्टीरिया की मात्रा काफी हद तक कम हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि कुत्ते के काटने के अलावा उसके चाटने से भी वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है. कुत्तों के अलावा सियार, बिल्ली और बंदर जैसे जानवरों में भी रेबीज का वायरस पाया जाता है. पिछले तीन माह के आंकड़े ( जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल के आंकड़े) महीना घायल पशुओं की संख्या मार्च 58 अप्रैल 49 मई 125

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