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Home झारखण्ड गढ़वा पर्यावरण संरक्षण में देर हुई, तो आनेवाली पीढ़ी को होगा भारी संकट

पर्यावरण संरक्षण में देर हुई, तो आनेवाली पीढ़ी को होगा भारी संकट

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पर्यावरण संरक्षण में देर हुई, तो आनेवाली पीढ़ी को होगा भारी संकट

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण परिवार के बैनर तले उत्सव गार्डन में बुधवार की शाम बढ़ते वैश्विक तापमान के बीच व्यक्तिगत प्रयास- विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. इसमें विभिन्न वर्ग के लोगों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये. अंत में गढ़वा जिले में पर्यावरण संरक्षण के लिए मिलकर कार्य करने के लिए एक वार्षिक कार्य योजना बनाने का निर्णय लिया गया. साथ ही पौधारोपण, वाटर हार्वेस्टिंग व पॉलिथीन उन्मूलन अभियान जैसे विषयों पर और प्रभावी तरीके से कार्य विस्तार करने का संकल्प व्यक्त किया गया. वक्ताओं ने अपने संबोधन में गढ़वा में इस गर्मी में तापमान बढ़कर 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाने पर चिंता व्यक्त की. लोगों ने कहा कि काफी देर हो चुकी है. यदि और देर की, तो जिस प्रकार से प्रदूषण बढ़ रहा है, आनेवाली पीढ़ी को भारी संकट से गुजरना पड़ेगा. वक्ताओं ने पर्यावरण के इस भयावह संकट से बचाने के लिये पर्यावरण संरक्षण के कार्य को जनांदोलन का रूप देने की आवश्यकता बतायी. इस दौरान वक्ताओं ने वर्तमान स्थिति में बदलाव लाने के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने, एसी का कम उपयोग करने, वाटर हार्वेस्टिंग व पॉलीथिन उन्मूलन जैसे विषयों पर जन जागरूकता के लिए व्यक्तिगत पहल करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की. लोगों ने कहा कि अभी तक पर्यावरण राजनीतिज्ञों के एजेंडे में नहीं आ पाया है. वर्तमान लोकसभा चुनाव में किसी भी दल के चुनावी घोषणा पत्र में पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा शामिल नहीं था. इसकी आलोचना करते हुए कहा गया कि अब जरूरत है कि ऐसी आवाज उठे कि राजनीतिज्ञों के एजेंडे में पर्यावरण संरक्षण भी प्रमुखता से शामिल हो. वक्ताओं ने कहा कि अगले एक साल तक ऐसा प्रयास हो कि पूरे गढ़वा जिले में पर्यावरण संरक्षण एक जनांदोलन बन सके. कार्यक्रम में विषय प्रवेश पर्यावरण परिवार के सचिव नितिन कुमार तिवारी ने, कार्यक्रम का संचालन शिक्षक मनोज द्विवेदी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रेम कुमार तिवारी ने किया. इन्होंने भी किया संबोधित : कार्यक्रम में समाजसेवी डॉ पातंजलि केसरी, आनंद कुमार दूबे उर्फ अन्नू दूबे, एसएन पाठक, सुनील दुबे, अमित शुक्ला, शैलेश तिवारी, सुरेश मानस, दिलीप श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव, प्रो कमलेश सिन्हा, देवराज उपाध्याय, अन्नु दुबे, बबलू दुबे, विपिन तिवारी, गौतम ऋषि, नमस्कार तिवारी, रामाशंकर चौबे, दिलीप पाठक, दिनेश चौबे, मनोज पाठक, दिवाकर तिवारी, चंद्रदेव सिंह, नीरज श्रीधर व अनिल सोनी ने भी अपने विचार व्यक्त किये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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