डंडई से रमेश विश्वकर्मा की रिपोर्ट
Garhwa News (डंडई): डंडई प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रसव के बाद एक प्रसूता की मौत से सोमवार को लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. आक्रोशित परिजनों, ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने मृतका का शव अस्पताल के मुख्य द्वार पर रखकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया. अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई और मुआवजा के साथ दोषी चिकित्साकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की गयी. मामले की जानकारी मिलने पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ वीरेंद्र कुमार राम अस्पताल पहुंचे और जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन परिजन उनकी बात से संतुष्ट नहीं हुए.
सिविल सर्जन ने जांच और कार्रवाई को दिया भरोसा
इसके बाद ग्रामीणों ने गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ जॉन एफ केनेडी को मौके पर बुलाने की मांग की. सिविल सर्जन के पहुंचने पर उन्होंने परिजनों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर अस्पताल की व्यवस्था सुधारने तथा लापरवाही बरतने वाले चिकित्सक, नर्स एवं संबंधित कर्मियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया. बावजूद इसके लोग नहीं माने और सिविल सर्जन और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को कई घंटे तक अस्पताल परिसर में बंधक बनाए रखा.
समय पर रेफर नहीं करने का लगाया आरोप
मृतका कमला कुमारी (पति-सोनू कुमार कुशवाहा) के परिजनों ने बताया कि 4 जुलाई की शाम करीब 8:30 बजे प्रसव के लिए उन्हें सीएचसी में भर्ती कराया गया था. सुबह करीब 3:30 बजे छोटे ऑपरेशन के माध्यम से प्रसव कराया गया, जिसमें महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया. परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान गंभीर लापरवाही हुई, जिसके बाद लगातार रक्तस्राव होने लगा. आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात नर्स ने चिकित्सक या वरिष्ठ नर्स को बुलाने के बजाय सफाईकर्मी को बुलाया. करीब साढ़े तीन घंटे तक रक्तस्राव जारी रहने के बावजूद महिला को समय पर रेफर नहीं किया गया. परिजन लगातार बेहतर इलाज के लिए रेफर करने की मांग करते रहे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गयी. बाद में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण निजी वाहन से महिला को गढ़वा के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गयी.
आश्वासन के बाद समाप्त हुआ धरना
सोमवार सुबह से शाम करीब चार बजे तक अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन चलता रहा. इस दौरान सिविल सर्जन एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अस्पताल परिसर में ही घिरे रहे. बाद में प्रखंड विकास पदाधिकारी देवलाल करमाली के पहुंचने पर सिविल सर्जन ने पीड़ित परिवार के एक सदस्य को चपरासी की नौकरी दिलाने, नवजात बच्ची की निशुल्क शिक्षा, आवास एवं अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया. इसके बाद धरना समाप्त हुआ और दोनों अधिकारियों को मुक्त किया गया.
क्या बोले सिविल सर्जन
इस पूरे घटना पर सिविल सर्जन ने कहा कि प्रसूता की मौत की घटना दुखद है. पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. अस्पताल के कुछ कर्मियों द्वारा मरीजों को सदर अस्पताल के बजाय निजी अस्पताल भेजने की शिकायत मिली है. यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो संबंधित चिकित्सक, नर्स एवं कर्मियों पर सख्त कार्रवाई होगी. अस्पताल की एंबुलेंस व्यवस्था सुदृढ़ करने और 24 घंटे चिकित्सकीय सेवा सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है.
धरना-प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक प्रतिनिधि सह पूर्व मुखिया दिनेश राम, मुखिया प्रतिनिधि महेश्वर राम, जिला परिषद सदस्य मोहन पासवान, प्रमुख प्रतिनिधि रामाशीष प्रसाद, भाजपा नेत्री अनीता गुप्ता, राजेश मेहता, मिथिलेश प्रसाद, सुभाष चंद्र मेहता, झामुमो नेता आनंद प्रकाश, तेज बहादुर सिंह, दीनानाथ पांडेय, नकछेदी राम, कांत राम, प्यारी सिंह, दिलबर कुमार, रवि सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं परिजन मौजूद रहे.
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