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Home झारखण्ड पूर्वी सिंहभूम East Singhbhum News : घाटशिला से सटे काकड़ाझोर में मिले बाघ के पंजे के निशान, गांवों में अलर्ट

East Singhbhum News : घाटशिला से सटे काकड़ाझोर में मिले बाघ के पंजे के निशान, गांवों में अलर्ट

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East Singhbhum News : घाटशिला से सटे काकड़ाझोर में मिले बाघ के पंजे के निशान, गांवों में अलर्ट

गालूडीह/घाटशिला. झारखंड-बंगाल सीमा पर बाघ की तलाश के लिए वन विभाग ने सोमवार को जंगल में 50 नाइट विजन सीसीटीवी कैमरे लगाये. वहीं, सीमा से सटे बंगाल के काकड़ाझोर में सोमवार की सुबह बाघ के पंजे के निशान देखे गये. बाघ की तलाश में करीब 100 वनकर्मी जुटे हैं. जहां-जहां बाघ के पंजे के निशान मिले हैं, उस इलाके के गांवों को अलर्ट कर दिया गया है. झाड़ग्राम के डीएफओ उमर इमाम के नेतृत्व में बांसपहाड़ी रेंज और बेपलहाड़ी के वन कर्मी जंगलों की खाक छान रहे हैं.

जानकारी हो कि रविवार को बेलपहाड़ी थाना क्षेत्र के मिनीयाडीह-बोंगडूबा जंगल में बाघ के पंजे के निशान देखे गये थे. सोमवार को जुझारधारा होते हुए कांकड़ाझोर तक बाघ के पंजे के कई निशान मिले. कांकड़ाझोर इलाका घाटशिला थाना के कानीमोहली गांव से बिल्कुल सटा है. सीमा पर एक नाला बहता है, उस पार झारखंड तो इस पार पश्चिम बंगाल है. आशंका है कि बाघ पश्चिम बंगाल के काकड़ाझोर, आमलाशोल होते हुए झारखंड के जंगलों में प्रवेश न कर जाये. वन विभाग ने बताया कि रविवार को जंगल में बाघ के पंजे के निशान मिलने के बाद गांवों को अलर्ट कर दिया गया है.

चांडिल व दलमा होते हुए बंगाल में पहुंचा है बाघ : वन विभाग

सोमवार की सुबह से शाम तक सीमावर्ती इलाके के मिनीयाडीह, बोंगडूबा, जुझारधारा, कांकड़ाझोर इलाके से सटे जंगल में नाइट विजन सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं, ताकि बाघ की गतिविधियां कैद हो सकें. पंजे के निशान तो मिले हैं, पर अब तक किसी ने बाघ को देखा नहीं है. इस इलाके अब तक बाघ ने किसी जानवर का शिकार भी नहीं किया है. बंगाल का वन विभाग कह रहा है कि बाघ चांडिल, दलमा से होते हुए इस इलाके के जंगल में पहुंचा है.

सुंदरवन की एक टीम भी पहुंची

वन विभाग के पदाधिकारियों से सूचना मिली है कि सुंदरवन की एक टीम भी पहुंची है. वहीं झाड़ग्राम, बांसपहाड़ी, बेलपहाड़ी के करीब 100 वन कर्मी बाघ को ढूंढने में जुटे हैं. हालांकि झाड़ग्राम के डीएफओ उमर इमाम ने सोमवार को पत्रकारों से कोई बात नहीं की. फोन करने पर रिसीव नहीं किया. वे अपनी टीम के साथ जंगलों की खाक छाने में जुटे रहे. ज्ञात हो कि ओड़िशा से भागी बाघिन जीनत के कारण एक माह तक ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के वन विभाग की टीम, पुलिस-प्रशासन सभी परेशान रहे. बाद में 29 दिसंबर को बाघिन बाकुड़ा के जंगल से पकड़ी गयी थी, तब राहत मिली थी. अब फिर से बाघ के पंजे के निशान मिलने से परेशानी बढ़ गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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