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Home झारखण्ड पूर्वी सिंहभूम East Singhbhum News : भाषा, संस्कृति, परंपरा व ग्राम व्यवस्था को बचाने की जरूरत

East Singhbhum News : भाषा, संस्कृति, परंपरा व ग्राम व्यवस्था को बचाने की जरूरत

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East Singhbhum News : भाषा, संस्कृति, परंपरा व ग्राम व्यवस्था को बचाने की जरूरत

गालूडीह. सुवर्णरेखा परियोजना के गालूडीह बराज के पास रविवार को भारतीय आदिवासी भूमिज समाज जिला कमेटी की ओर से मिलन समारोह का आयोजन किया गया. इसमें बंगाल, ओडिशा और झारखंड से हजारों की संख्या में समाज के लोग पारंपरिक परिधान में शामिल हुए. जिला कमेटी के अध्यक्ष सुसेन सिंह, सचिव शंभू सिंह, कोषाध्यक्ष रुक्मिणी सिंह, जिप सदस्य सुभाष सिंह, मुखिया लाल मोहन सिंह, बासंती प्रसाद सिंह ने झंडोत्तोलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. दोपहर में समाज पर सामूहिक परिचर्चा हुई. इसमें समाज के लोगों ने कहा कि चुआड़ और भूमिज विद्रोह की इस मिट्टी में भाषा, संस्कृति, परंपरा और ग्राम व्यवस्था को बचाये रखने की जरूरत है. इसके लिए सभी ने सामूहिक संकल्प भी लिया. तीनों राज्यों के भूमिज समाज ने एक दूसरे से पारिवारिक एवं सामाजिक विचारों का आदान प्रदान पर बल दिया. भूमिज समाज के सामाजिक और राजनीतिक विकास पर बात कही गयी. कहा कि घाटशिला- धालभूम क्षेत्र वीरभूमि में स्थित है. ब्रिटिश हुकूमत ने कोलकाता में ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम से प्रवेश किया था और व्यवसाय को बढ़ाने की रणनीति के नाम पर जंगल महल में घुसपैठ कर भूमिज गांवों में आक्रमण किया था. कहा गया कि झारखंड सरकार ने बिरसा मुंडा संग्रहालय रांची में चुआड़ एवं भूमिज विद्रोह के महानायक वीर गंगा नारायण सिंह की आदमकद प्रतिमा स्थापित की है.

सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक और ऐतिहासिक विषय पर सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता हुई. साथ ही विभिन्न तरह की खेलकूद प्रतियोगिता भी हुई. इसमें समाज के युवाओं ने भाग लिया. विजेता को पुरस्कृत भी किया गया. दोपहर में सामूहिक भोज का आयोजन हुआ. इसमें समाज के लोग शामिल हुए. यहां मेला भी लगा था.

सामूहिक व छऊ नृत्य पर थिरका समाज

दोपहर से शाम तक पारंपरिक सामूहिक नृत्य और छऊ नृत्य हुआ. इसमें समाज के लोग ढोल-धमसे और मांदर की थाप पर थिरके. तीनों राज्यों से पहुंचे लोग अपने-अपनी टीम बनाकर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया. वहीं सिंहभूम आदिवासी चुआड़ छऊ सोसायटी द्वारा उस्ताद सुकलाल सिंह, प्रबंधक रथु सिंह, सुफल सिंह के नेतृत्व में आकर्षक छऊ नृत्य प्रस्तुत किया गया. क्रिसमस करीब होने पर सांता का रूप धारण कर भी छऊ कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुत किया.

सामाजिक परिचर्चा में शामिल हुए ये लोग

रूद्र नारायण सिंह, नीलू सिंह, नंद सिंहदेव, युधिष्ठिर सिंह, हरीश सिंह, दिनेश सिंह, बासंती प्रसाद सिंह, रथु सिंह, लाल मोहन सिंह, सुसेन सिंह, गौर मोहन सिंह, सुभाष सिंह, सपन सिंह, छुटू सिंह, छुटू भूमिज, नेआलाल सरदार, निरंजन सरदार, युगल किशोर, वीर सिंह, बेहुला सरदार, अनंत मुंडा, आकाश मुंडा, अजीत मुंडा, प्रकाश मुंडा, निरंजन सरदार, मिलू सरदार, जयसिंह भूमिज, सुकरा सिंह, सिद्धेश्वर सिंह, सुनील सिंह आदि शामिल हुए.

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