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Home झारखण्ड पूर्वी सिंहभूम सुवर्णरेखा की गोद में प्यासे हैं खेत, 800 बीघा में पसीने से सब्जी उगा रहे किसान

सुवर्णरेखा की गोद में प्यासे हैं खेत, 800 बीघा में पसीने से सब्जी उगा रहे किसान

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सुवर्णरेखा की गोद में प्यासे हैं खेत, 800 बीघा में पसीने से सब्जी उगा रहे किसान

बहरागोड़ा.

बहरागोड़ा प्रखंड की पाथरी पंचायत स्थित बामडोल गांव में इस साल बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती हुई है. किसानों ने लगभग 800 बीघा भूमि पर खीरा, करेला, लौकी समेत विभिन्न सब्जियों की खेती की है. जून के अंतिम सप्ताह तक उत्पादन शुरू होगा. हालांकि, किसान मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी सुविधाएं मिलीं, तो पूरे राज्य को सब्जियां आपूर्ति करने में सक्षम है.

2000 रुपये तक प्रति बीघा पानी खरीद रहे किसान

क्षेत्र में पांच किसानों ने निजी सबमर्सिबल की व्यवस्था की है. ये स्वयं खेती करने के साथ दूसरे किसानों को भी सिंचाई के लिए पानी बेचते हैं. किसानों को 1500 से लेकर 2000 रुपये प्रति बीघा की दर से पानी खरीदनी पड़ रही है. सरकारी स्तर पर सिंचाई का कोई साधन उपलब्ध नहीं है.

उद्वह सिंचाई योजना फेल, भवन बना खंडहर

सुवर्णरेखा नदी के किनारे बसे बामडोल गांव में 1990 के दशक में किसानों की सुविधा के लिए उद्वह सिंचाई योजना शुरू हुई थी. नदी का पानी खेतों तक पहुंचाने वाली यह योजना रखरखाव के अभाव में कुछ वर्षों में बंद हो गयी. स्थानीय किसानों का कहना है कि राज्य में कई सरकारें आयीं और गयीं, लेकिन इसे पुनर्जीवित करने का प्रयास किसी ने नहीं किया. आज नदी पास में बहती तो है, लेकिन पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाता है.

बीजों के दाम में भारी वृद्धि, किसानों पर आर्थिक बोझ

सब्जियों के बीज लगातार महंगा हो रहा है. किसानों के अनुसार, वर्ष 2025 की तुलना में इस बार प्रति किलो बीज पर 300 से 500 रुपये की वृद्धि हुई है. इस सीजन में खीरा का बीज 12,000 रुपये व झींगा 5,000 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहा है, जबकि करेला का एक बीज 4.50 रुपये में खरीदना पड़ रहा है. लागत दोगुनी होने से किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं.

वर्षों से कोल्ड स्टोर की मांग, औने-पौने दाम में फसल बेचने की मजबूरी

बामडोल के किसान साल में दो बार बड़े पैमाने पर सब्जी उगाते हैं. कोल्ड स्टोर नहीं होने के कारण उत्पादन अधिक होने पर उन्हें सब्जियां औने-पौने दाम में बेचनी पड़ती हैं. कई बार लागत नहीं मिलने पर फसल खेतों में सड़ जाती है. किसानों का आरोप है कि स्थानीय व्यापारी कम मूल्य पर सब्जियां खरीदकर बाहरी राज्यों में ऊंचे दाम पर बेचते हैं. यदि यहां कोल्ड स्टोर बन जाये, तो किसानों को उचित मूल्य मिल सकेगा.

क्या कहते हैं किसान…

आज भी किसान आर्थिक दंश झेल रहे हैं. सरकारी स्तर पर किसी प्रकार की सहायता नहीं मिल पा रही है. ऊंचे दर पर बीज व खाद खरीदनी पड़ रही है. – रिंकू साहू, किसाननिजी सिंचाई व्यवस्था से चार बीघा में सब्जी की खेती की है. सरकारी सुविधा के साथ यहां पर कोल्ड स्टोर निर्माण होने से किसानों को काफी फायदा होगा. – परितोष नायक, किसानआज भी यहां के किसान मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. सरकारी सिंचाई व्यवस्था नहीं होने से कई किसानों को पानी खरीद कर खेती करनी पड़ती है. – भवरंजन घोष, किसानउद्वह सिंचाई योजना कभी कारगर साबित हो रही थी, मगर आज खंडहर में तब्दील हो गयी है. सरकार को योजना चालू कर कोल्ड स्टोर बनाना चाहिए. – अजीत पाल, किसान

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