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Home झारखण्ड पूर्वी सिंहभूम सात साल बाद दो घाटों से वैध बालू उठाव शुरू, विकास योजनाओं में आयेगी तेजी

सात साल बाद दो घाटों से वैध बालू उठाव शुरू, विकास योजनाओं में आयेगी तेजी

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सात साल बाद दो घाटों से वैध बालू उठाव शुरू, विकास योजनाओं में आयेगी तेजी

गुड़ाबांदा.

पूर्वी सिंहभूम जिले में पिछले सात वर्षों (साल 2018-19) से जारी बालू संकट पर आखिरकार हल्की राहत मिली है. जिला प्रशासन से वैध खनन और परिवहन का रास्ता साफ होने से निजी और सरकारी निर्माण कार्यों को गति मिलेगी. इससे स्थानीय संवेदकों (ठेकेदारों) को बड़ी राहत मिली है. झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद से कंसेंट टू ऑपरेट (संचालन की अनुमति) मिलने के तुरंत बाद, जिला खनन विभाग ने गुड़ाबांदा प्रखंड में सुवर्णरेखा नदी के तट पर स्थित दो प्रमुख बालू घाटों के लिए सोमवार को परिवहन चालान जारी कर दिया. इसके साथ क्षेत्र में वैध तरीके से बालू का उठाव शुरू हो गया है.

एक ट्रैक्टर बालू 700 रुपये में होगा लोड

गुड़ाबांदा प्रखंड की बनमाकड़ी पंचायत अंतर्गत आने वाले कोरिया मोहनपाल बालू घाट (34.70 हेक्टेयर) और दूसरे कोरिया मोहनपाल बालू घाट (46.30 हेक्टेयर) का टेंडर गोदावरी कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को मिला है, जिसने संचालन शुरू कर दिया है. सरकार द्वारा बालू की दर 12.8 रुपये प्रति सीएफटी निर्धारित की गयी है, जिसका सीधा अर्थ है कि एक ट्रैक्टर बालू लगभग 700 रुपये में लोडिंग के साथ उपलब्ध हो जायेगा. इस वैध शुरुआत से आम जनता को उचित और तय सरकारी दरों पर बालू मिल सकेगा. वहीं, इस पूरी खनन प्रक्रिया से राज्य सरकार को लगभग 20 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना है.

गरीबों को मिलेगी आशियाने की सौगात

इस महत्वपूर्ण फैसले से झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी अबुआ आवास योजना और केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना के उन हजारों गरीब लाभुकों को सबसे बड़ी राहत मिली है, जो बालू की किल्लत और आसमान छूती कीमतों के कारण महीनों से अपने सपनों का घर नहीं बना पा रहे थे. इसके अलावा अन्य रुकी हुई विकास योजनाएं भी अब रफ्तार पकड़ सकेंगी.

अवैध खनन को रोकना बड़ी चुनौती

एक तरफ जहां वैध उठाव शुरू होने से बालू माफियाओं के सिंडिकेट पर सीधा प्रहार हुआ है, वहीं प्रशासन के सामने कुछ नयी चुनौतियां भी खड़ी हो गयी हैं. सोमवार को एक तरफ वैध काम शुरू हुआ, तो दूसरी तरफ इसी लीज एरिया के पास के घाटों से अवैध खनन भी देखा गया. इससे पहले यहां से पश्चिम बंगाल और ओडिशा में चोरी-छिपे प्रति हाइवा 25 से 30 हजार रुपये में बालू बेचा जा रहा था. इसके अलावा, घाट के समीप बनाये गये स्टॉक प्वाइंट पर कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भ्रम की स्थिति है कि यह किसका स्टॉक प्वाइंट है और कितने क्षेत्र में बालू जमा करना है.

बालू स्टॉक करने के लिए नौ दिनों का समय

सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौती समय की कमी है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्त निर्देशों के मुताबिक, मॉनसून के कारण 10 जून से 15 अक्टूबर तक नदियों से बालू उठाने पर पूरी तरह रोक लग जायेगी. ऐसे में प्रशासन और संवेदकों के पास स्टॉक जमा करने के लिए केवल 9 दिन का समय शेष है. यही वजह है कि मॉनसून अवधि के दौरान बाजार में बालू की किल्लत न हो, इसके लिए घाटों से बालू उठाकर अन्य निर्धारित स्थलों पर तेजी से डंप करने की तैयारी की जा रही है.

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