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Home झारखण्ड दुमका संतमत सत्संग का दो दिवसीय 36वां वार्षिक अधिवेशन प्रारंभ

संतमत सत्संग का दो दिवसीय 36वां वार्षिक अधिवेशन प्रारंभ

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संतमत सत्संग का दो दिवसीय 36वां वार्षिक अधिवेशन प्रारंभ

रामगढ़. दुमका जिला संतमत सत्संग समिति का दो दिवसीय 36वां वार्षिक अधिवेशन दुमका तथा गोड्डा जिले की सीमा पर अवस्थित सरमुड़िया पंच पहाड़ में रविवार को प्रारंभ हो गया. रामगढ़ प्रखंड की छोटी रण बहियार पंचायत के पंच पहाड़ स्थित महर्षि मेंहीं भक्ति योग आश्रम में आयोजित दुमका जिला संतमत सत्संग के वार्षिक अधिवेशन का प्रारंभ प्रातः कालीन सत्र में स्तुति, जप, प्रार्थना तथा सद्ग्रंथ के पाठ से की किया गया, जबकि दोपहर बाद के सत्र में प्रवचन का कार्यक्रम हुआ. कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रह्मलीन महर्षि मेंहीं के परम शिष्य स्वामी वेदानंद जी महाराज, स्वामी जगपरानंद जी महाराज, निरंजनानंद जी महाराज ,रमन जी महाराज, सुबोधानंद की महाराज, संत बाबा, किशोरा नंद जी महाराज सहित कई संत-महात्माओं ने संतमत सत्संग के सिद्धांतों की व्याख्या किया. प्रवचन के दौरान स्वामी वेदानंद जी महाराज ने कहा कि गुरु के बिना कोई भी ज्ञान संभव नहीं है. गुरु के बताये मार्ग पर चलते हुए विश्वास पूर्वक भक्ति करने पर ही मनुष्य भवसागर से पार हो सकता है. मनुष्य को अपने शरीर के अंदर के ईश्वर को जगाने की आवश्यकता है. लोग अपने स्वार्थ के लिए इस तरह परेशान हैं कि उन्हें सही-गलत की पहचान नहीं है. मनुष्य को भौतिक सुखों को छोड़कर परमात्मा को प्राप्त करने की जरूरत है. संसार में सबसे बड़ा दुख जीव का संसार चक्र में आवागमन है. जिनके दर्शन से आवागमन के चक्र से मुक्ति मिलती है, वही परमात्मा हैं. परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग हमें सद्गुरु ही दिखलाते हैं. उन्होंने कहा कि मनुष्य को भवसागर से पार उतरने के लिए सद्गुरु के सानिध्य में सत्संग करना चाहिये.संतों के चरण की भक्ति से ही जीव का कल्याण संभव है. प्रवचन के दौरान मंच संचालन यशपाल रजक कर रहे थे. जिला अधिवेशन के सत्संग में शामिल होने के लिए दुमका के विभिन्न प्रखंडों के साथ-साथ गोड्डा जिले के विभिन्न ग्रामों से भी बड़ी संख्या में सत्संग प्रेमी सरमुड़िया पंच पहाड़ पहुंचे हैं. आयोजकों के अनुसार प्रतिदिन दो सत्रों में सत्संग, प्रवचन, ध्यान, आरती, विनती का कार्यक्रम आयोजित होगा.

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