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छह में तीन चापानल खराब, जलमीनार पड़ी है बेकार

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छह में तीन चापानल खराब, जलमीनार पड़ी है बेकार

काठीकुंड. प्रखंड के फिटकोरिया गांव में प्रभात खबर आपके द्वार के माध्यम से ग्रामीणों ने गांव की समस्याएं रखीं. बताया कि गांव में आदिवासी, घटवाल व नाई समाज के 60 से ज्यादा परिवार निवास करते हैं. गांव में पानी की व्यवस्था के लिए छह चापानल हैं. इसमें तीन चापानल लंबे समय से खराब है. लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है. वर्तमान में जिन चापानलों से ग्रामीणों को पानी मिल रहा है, उनसे या तो कम मात्रा में पानी आता है या काफी मशक्कत के बाद पानी निकल पाता है. गांव में घटवाल टोला स्थित एक मात्र जलमीनार भी वर्षों से बेकार पड़ी है. इस कारण ग्रामीणों को जहां पेयजल की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. नहाने व अन्य कार्यों के लिए भी ग्रामीण महिला पुरुष को नदी का रुख करना पड़ता है. इस कारण ग्रामीण इस बात का भी अफसोस जता रहे हैं. क्या कहते हैं ग्रामीण गांव में मजदूरी करनेवाले लोग हैं. पानी के लिए प्राकृतिक स्रोत व सरकारी व्यवस्था पर ही आश्रित हैं. अब इसे मजबूरी कहे या हमारी नियति. समस्या का जल्द समाधान हो. उगन राय खेती व मजदूरी ही हमारा मुख्य पेशा है. हमारी उतनी आमदनी नहीं कि हर घर में बोरिंग करा पाये. खराब चापानल की मरम्मत कराते हुए पानी की समस्या दूर होनी चाहिए. दशरथ राय गांव के घटवाल टोला स्थित एकमात्र जलमीनार वर्षों से खराब है. चापानल में जलमीनार लगने के कारण चापानल भी बेकार हो गया है. जल्द मरम्मत की पहल करनी चाहिए. लूदु राय डिजिटल दौर में अगर पानी के लिए हमें भटकना पड़े, तो यह हमारा दुर्भाग्य ही कहा जायेगा. घर-घर नल से जल तो दूर गांव के लिए जलमीनार लगी है. वह भी बंद है. पुरन राय सुबह से घर का काम, फिर मशक्कत कर के चापानल से पानी लाना और फिर भी पानी की पूर्ति नहीं होने के कारण नदी का रुख करना, यह हमारी मजबूरी है शौक नहीं. रमिया देवी आज जहां हर घर जल नल की बात होती है. हमारे गांव में इस सुविधा की बात करना बेइमानी सी होगी. पानी की कमी के कारण ही महिला नदी गयी थी और हत्या हो गयी. पानवती देवी संताल परगना में सभी घरों में गंगा जल परियोजना से गंगा जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. परियोजना कब पूरी होगी. हम पानी की किल्लत से आजाद होंगे. पता नहीं. कुमी देवी वर्षों से यह चापानल और जलमीनार खराब है. लेकिन न विभाग सुधि ले रहा और न जनप्रतिनिधि, नतीजतन इसका खामियाजा जान गवां कर भुगतना पड़ रहा है. ललिता देवी

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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