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Home झारखण्ड दुमका तालाब से पटवन पर रोकने पर दो गांवों के बीच तनाव

तालाब से पटवन पर रोकने पर दो गांवों के बीच तनाव

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तालाब से पटवन पर रोकने पर दो गांवों के बीच तनाव

100 एकड़ जमीन में लगी फसल के सूखने की आशंका, फुलजोरा के किसान परेशान रामगढ़. सरकारी सिंचाई तालाब के पानी से खेत में लगी फसलों की सिंचाई पर रोक लगाये जाने से रामगढ़ थाना क्षेत्र के दो गांवों के ग्रामीणों के बीच तनाव उत्पन्न हो गया है. सैकड़ों बीघे जमीन में लगी गेहूं, सरसों, मटर, चना, मूली, बैगन जैसी फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं. विवाद छोटी रण बहियार पंचायत के लौढ़िया तथा बड़ी रणबहियार पंचायत के फुलजोरा गांवों के ग्रामीणों के बीच है. दोनों गांवों का पंचायत भले ही अलग-अलग है. पर फुलजोरा तथा लौढ़िया दोनों गांव एक-दूसरे के अगल-बगल में अवस्थित हैं. फुलजोरा पूर्ण रूप से खेतिहर किसानों का गांव है. यहां के किसान खरीफ फसल के साथ-साथ रबी फसलों की खेती भी बड़े पैमाने पर करते हैं. गांव की सीमा पर बहने वाली धोबई जोरिया के पानी के साथ फुलजोरा तथा लौढिया की सीमा पर अवस्थित दो बडे सिंचाई तालाब के पानी पर निर्भर हैं. दोनों तालाब सरकारी है. फुलजोरा के किसानों का आरोप है कि लौढ़िया की ग्राम प्रधान सूरज मुनि हांसदा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने फुलजोरा के किसानों को तालाब के पानी से सिंचाई करने से रोक दिया है. क्या है मामला लौढ़िया तथा फुलजोरा की सीमा पर दो बड़े-बड़े सरकारी तालाब अवस्थित हैं. दोनों तालाबों का निर्माण कई दशकों पूर्व हुआ है. दोनों तालाबों से पूर्व में नहर भी निकाली गयी थी. बाद नहर में मिट्टी भर गयी. इस कारण नहर विलुप्त होने के कगार पर है. रबी फसलों की सिंचाई का मुख्य स्रोत तालाबों का पानी है. भौगोलिक रूप से तालाब लौढ़िया गांव की जमीन पर है. फुलजोरा के किसानों का कहना है कि वे लोग कई पीढियां से इन दोनों तालाबों के पानी से अपनी फसलों की सिंचाई करते आ रहे हैं. हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी फुलजोरा के किसानों ने बड़े पैमाने पर गेहूं, सरसों, मटर,आलू, चना जैसी रबी फसलों की खेती की हैं. फुलजोरा के किसान सुरेंद्र राउत, गुलशन मांझी, संतोष राउत, पटन राय, जयप्रकाश राय, शिबु राय आदि के अनुसार दोनों ही गांवों के किसानों ने फसल लगायी है. पर लौढ़िया के किसानों की तुलना में फुलजोरा के किसानों ने ज्यादा जमीन पर खेती की है. यहां के 50-60 किसानों ने लगभग 100 एकड़ जमीन पर गेहूं, मटर, सरसों,आलू मूली, चना जैसे फसलों की खेती की है. पर इस वर्ष लौढ़िया की ग्राम प्रधान सूरज मुनि हांसदा समेत अन्य कई ग्रामीणों ने दोनों तालाबों से फुलजोरा के किसानों को सिंचाई पर करने को रोक लगा दिया है. लौढिया वालों का कहना है कि इतनी ज्यादा खेतों की सिंचाई करने से तालाबों का पानी समाप्त हो जायेगा. तालाब सूख जायेगा. मवेशी के लिए पानी की किल्लत हो जायेगी क्या कहते हैं फुलजोरा के किसान हम लोग कई पीढियां से सिंचाई के लिए तालाब पर निर्भर हैं. लौढिया की ग्राम प्रधान का नेतृत्व में वहां के ग्रामीणों ने इस बार सिंचाई पर रोक लगा दिया है. सुरेंद्र राउत दो बीघा जमीन में सरसों, गेहूं तथा मटर की खेती की है. अब तालाब के पानी से सिंचाई पर रोक लगाया जा रहा है. पानी की कमी से फसलें सूख रही हैं. वीणा देवी एक तरफ तो सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है. दूसरी तरफ सिंचाई के पानी पर रोक लगाई जा रही है. प्रशासन सिंचाई की व्यवस्था करे. शांति देवी प्रशासन को दोनों गांव के किसानों के साथ बात-चीत कर मामले का हल निकालना चाहिए. जिससे फसलों को सिंचाई के लिए पानी मिल सके. जयप्रकाश राउत सिंचाई के पानी पर रोक लगाए जाने के कारण लगभग 100 एकड़ में लगी फसल के सूखने की आशंका है. प्रशासन शीघ्र पहलकर विवाद को समाप्त कराये. जंगलु राउत क्या कहते हैं अधिकारी तालाब से सिंचाई के पानी को लेकर दो गांव में विवाद की सूचना मिली है. पता लगाया जा रहा है. विवाद का समाधान निकाल लिया जायेगा. कमलेंद्र कुमार सिन्हा, बीडीओ.

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