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Home झारखण्ड दुमका दुमका का बेटा बना स्टेट सेकेंड टॉपर, आईएएस बनने का सपना लेकर अंकित ने रचा इतिहास

दुमका का बेटा बना स्टेट सेकेंड टॉपर, आईएएस बनने का सपना लेकर अंकित ने रचा इतिहास

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दुमका का बेटा बना स्टेट सेकेंड टॉपर, आईएएस बनने का सपना लेकर अंकित ने रचा इतिहास
झारखंड में सेकेंड स्टेट टॉपर अंकित कुमार. फोटो: प्रभात खबर

दुमका से आनंद जायसवाल की रिपोर्ट

JAC Inter Result: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की 12वीं कला संकाय परीक्षा में दुमका के अंकित कुमार ने पूरे राज्य में दूसरा स्थान हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है. 474 अंक के साथ स्टेट सेकेंड टॉपर बने अंकित की सफलता से पूरे इलाके में खुशी की लहर है.

गांव से शहर तक का संघर्ष, तब मिली कामयाबी

अंकित मसलिया प्रखंड के गोलबंधा गांव का निवासी है और पीएम श्री प्लस टू नेशनल उच्च विद्यालय दुमका का छात्र है. विद्यालय दूर होने के कारण वह पिछले पांच वर्षों से शहर में रहकर पढ़ाई कर रहा था. उसकी मां संध्या दे सहायक शिक्षिका हैं, जबकि पिता सुशील कुमार दे स्टेशनरी दुकान चलाते हैं. सीमित संसाधनों के बीच अंकित ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया.

10-12 घंटे पढ़ाई, टेक्नोलॉजी का भी लिया सहारा

अंकित ने बताया कि उसने रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई की. स्व-अध्ययन के साथ यूट्यूब और चैटजीपीटी जैसे प्लेटफॉर्म की मदद ली. उसका लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में जाकर देश की सेवा करना है. इसी को ध्यान में रखते हुए उसने आर्ट्स संकाय चुना, ताकि आगे यूपीएससी की तैयारी में मदद मिल सके.

जापान तक पहुंचा हुनर, पहले भी रह चुका है टॉपर

अंकित वर्ष 2024 में 10वीं परीक्षा में जिले का टॉपर रह चुका है. इसी उपलब्धि के आधार पर उसे भारत सरकार की ओर से ‘सकुरा साइंस एक्सचेंज प्रोग्राम 2024’ के तहत जापान जाने का अवसर मिला. वहां उसने विज्ञान-तकनीक के साथ सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को करीब से समझा. यह अनुभव उसकी सोच और लक्ष्य को और मजबूत करने वाला साबित हुआ.

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स्कूल को गर्व, छात्रों के लिए बना प्रेरणा

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक डॉ बसंत कुमार ने कहा कि अंकित शुरू से ही मेधावी छात्र रहा है. उसकी इस उपलब्धि से पूरा विद्यालय परिवार गौरवान्वित है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अंकित की सफलता से अन्य छात्र भी प्रेरित होंगे और बेहतर प्रदर्शन करेंगे.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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