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Home झारखण्ड दुमका प्रेमपूर्ण भक्ति से वशीभूत हो खिंचे चले आते हैं भगवान

प्रेमपूर्ण भक्ति से वशीभूत हो खिंचे चले आते हैं भगवान

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प्रेमपूर्ण भक्ति से वशीभूत हो खिंचे चले आते हैं भगवान

शिकारीपाड़ा. प्रखंड के सरसाजोल शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित भागवत कथा के तीसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी लीला का रहस्य बताते हुए बंगलादेश का व्यास वक्ता राहुल कृष्ण दास ने कहा कि प्रेमपूर्ण भक्ति से वशीभूत होकर माखन चोरी के बहाने कृष्ण नित्य दर्शन देने गोपियों के घर जाते थे. उन्होंने कहा कि राजा नंद के घर में न तो गायों की कमी थी और न ही माखन आदि की ही. इस दौरान उन्होंने प्रभु द्वारा ग्वाल बाल संग माखन चोरी का जीवंत प्रसंग प्रस्तुत किया. कहा कि गोपियों द्वारा उलाहना देने में भी कृष्ण के प्रति उनका अटूट प्रेम ही झलकता है. कथा प्रसंग के माध्यम से उन्होंने ध्रुव की विमाता द्वारा सिंहासन में बैठे पिता की गोद से खींचकर उतारने, व्यंग्यात्मक कटु वचन कहने, ध्रुव का गृह त्याग, देव ऋषि नारद को गुरु के रूप में प्राप्ति व ध्रुव द्वारा परम पद प्राप्त करने का प्रसंग प्रस्तुत किया. कहा कि इस युग में नाम संकीर्तन के माध्यम से परमगति को प्राप्त किया जा सकता है. उन्होंने नाम संकीर्तन का महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि नाम जाप से उत्पन्न तरंगें ही जीवात्मा को परमशक्ति परमात्मा से जोड़ती हैं. नाम रूपी नाव के सहारे जीवात्मा भवसागर को पार कर परम लक्ष्य परमात्मा तक पहुंच सकते हैं. इस दौरान उन्होंने कथा की महिमा बताते हुए कहा कि लोग सांसारिक जीवन में चाहकर भी एकनिष्ठ होकर नाम स्मरण नहीं कर पाते हैं पर कथा में शामिल होने से विशेष प्रयास के बिना ही सभी का मन सामूहिक रूप से एकनिष्ठ हो जाता है. इस क्रम में कथा के मध्यम से भक्त प्रह्लाद की कथा, गोकर्ण व उनके भाई धुंधकारी की प्रेतयोनि से मुक्ति का प्रसंग प्रस्तुत किया. भागवत कथा का आयोजन व राधा-कृष्ण के भजनों से आसपास का वातावरण भक्तिमय हो गया. भागवत कथा आयोजन समिति में मुख्य रूप से असीम कुमार मंडल, सपन मंडल, सोमनाथ मंडल, षष्ठी मंडल, आलोक मंडल, सनातन मंडल आदि मुख्य भूमिका में रहे.

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