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Home झारखण्ड दुमका प्ले स्कूल की तरह विकसित होंगे जिले के आंगनबाड़ी केंद्र

प्ले स्कूल की तरह विकसित होंगे जिले के आंगनबाड़ी केंद्र

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प्ले स्कूल की तरह विकसित होंगे जिले के आंगनबाड़ी केंद्र

दुमका. दुमका जिले में डीएफएमटी के पैसे का उपयोग कर पिछले एक साल से आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली दूर करने व वहां आनंददायी शिक्षा का माहौल पैदा करने के लिए प्ले स्कूल के रूप में विकसित कराने की जहां पहल हुई है, वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों से मिलनेवाली सेवाओं व उपलब्ध सुविधाओं में गुणवत्तापूर्ण सुधार की भी कवायद की गयी है. जिले में 2060 आंगनबाड़ी केंद्र हैं. इसमें से कई आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल के रूप में विकसित कराया गया है. पहले जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के बैठने के लिए दरी, पढ़ाने के लिए ब्लैक बोर्ड, कुछ पुराने टूटे-फूटे खिलौने ही नजर आते थे, पर अब ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के खेलने के लिए रबर की रंग-बिरंगी मैट, बैठने के लिए प्लास्टिक की कुर्सी व टेबल आदि उपलब्ध करायी गयी है, तो पढ़ाने के लिए ह्वाइट बोर्ड लगाये गये हैं. भवन का रंग-रोगन भी किसी प्राइवेट प्ले स्कूलों की तरह करके सजाया गया है. रंग-बिरंगे स्लाइडर व सी-सॉव जैसे खिलाैने भी बच्चों को केंद्र तक आने के लिए आकर्षित कर रहे हैं. 300 आंगनबाड़ी केंद्रों को बनाया जा रहा मॉडल जिले के 300 आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र बनाने की भी पहल डीएफएमटी से ही हो रही है. हर केंद्र में इसके लिए तीन लाख 30 हजार रुपये लगभग खर्च किये जायेंगे. इस राशि से आंगनबाड़ी भवनों में बच्चों को मिलनेवाली सुविधाओं के अनुरूप विकसित किया जा रहा है. वित्तीय वर्ष 150 नये मॉडल आंगनबाड़ी भवनों के विकास में लगभग 4.95 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में भी इतने ही केंद्रों को मॉडल बनाने की पहल शुरू हुई थी. 10 प्रखंडों में आंगनबाड़ी केंद्र के बन रहे 50 नये भवन जिले में पिछले वित्तीय वर्ष में सभी 10 प्रखंड यथा दुमका, जामा, जरमुंडी, मसलिया, रामगढ़, रानीश्वर, शिकारीपाड़ा, काठीकुंड, गोपीकांदर व सरैयाहाट में 12 लाख छियासी हजार रुपये की लागत से पांच-पांच आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण की स्वीकृति डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट यानी डीएफएमटी से दी गयी है. इनमें से ज्यादातर ऐसे जगहों पर भवन निर्माण कराये जा रहे हैं, जहां के केंद्र अब तक भवनविहीन थे. सेविकाओं के घर से ही जैसे-तैसे संचालित होते थे या फिर पुराना भवन बेहद जर्जर था. सभी 2060 सेविकाओं के लिए खरीदे गये मोबाइल जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों से सही समय पर और एकरुपता के अनुरूप रियल टाइम रिपोर्ट मिल सके. इसके लिए सभी केंद्र की सेविकाओं को 5 जी नेटवर्क की सुविधावाली एंड्रायड सेट उपलब्ध करायी गयी है. एक-एक मोबाइल की कीमत 19 हजार रुपये है. पोषण ट्रैकर में सेविकाएं रिपाेर्ट कर भी रही है. जिला समाज कल्याण कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक 2060 केंद्रों में से 92 प्रतिशत केंद्र इसका उपयोग कर भी रही है. इसे विभाग शत-प्रतिशत करने का प्रयास कर रहा है. ड्रेस पहनकर आते बच्चे, वुलेन कपड़े भी देने की तैयारी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चे अब निर्धारित पोशाक पहनकर आने लगे हैं. पोशाक पहनकर, पैरों में जूते और पीछे स्कूल बैग लटकाये केंद्रों पर आते-जाते बच्चे दिखते हैं. आंगनबाड़ी केंद्रों के डिजिटाइजेशन पर भी जिला प्रशासन काम कर रहा है, ताकि बच्चों को ऑडियो-विजुअल तकनीक से खेल-खेल में आनंददायी शिक्षा दिलायी जा सके. प्री स्कूल किट भी उपलब्ध कराया गया है. खाना बनाने के बर्तन से लेकर प्रेशर कुकर व खाना खाने के लिए प्लेट आदि भी उपलब्ध कराये गये हैं. सरकार के स्तर से पिछले ठंड में स्वेटर उपलब्ध कराये गये थे, अब डीएफएमटी से वुलेन पैंट देने की भी तैयारी चल रही है. सभी केंद्रों में प्रसवपूर्व जांच के लिए एएनसी कार्नर के लिए भी संसाधन उपलब्ध कराया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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