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Home झारखण्ड दुमका Basukinath: फौजदारी बाबा मंदिर की शिखर से उतारा गया पंचशूल, 15 को दुल्हा बनेंगे भोलेनाथ

Basukinath: फौजदारी बाबा मंदिर की शिखर से उतारा गया पंचशूल, 15 को दुल्हा बनेंगे भोलेनाथ

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Basukinath: फौजदारी बाबा मंदिर की शिखर से उतारा गया पंचशूल, 15 को दुल्हा बनेंगे भोलेनाथ
पंचशूल के साथ पुरोहित और श्रद्धालुगण.

आदित्यनाथ पत्रलेख
Basukinath: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में शिव विवाह की तैयारी जोर शोर से चल रही है. शुक्रवार को मंदिर के गुंबद के शिखर से पंचशूल, चांदी का झंडा, त्रिशूल, कलश, ध्वजा आदि को उतारा गया. बाबा मंदिर के शिखर से सबसे पहले पंचशूल का उतारा गया, इसके बाद माता पार्वती, माता काली, माता अन्नपूर्णा, श्री कृष्ण मंदिर, आनंद भैरव सहित अन्य मंदिर के गुंबद पर सजे कलश एवं त्रिशूल को उतारा गया. पंचशूल सहित बाकी चीजों की सफाई कर उसे फिर से वहां स्थापित किया जाएगा. महाशिवरात्रि के दिन ही पंचशूल को शिखर पर फिर से स्थापित किया जाता है.

रविवार को होगी भोले बाबा की शादी

रविवार को भोलेनाथ दुल्हा बनेंगे. भव्य शिव बारात निकाली जाएगी. विशेष पूजा-अर्चना के बाद, महाशिवरात्रि के दिन पंचशूल को फिर से शिखर पर स्थापित कर दिया जाता है. मंदिर में पंचशूल का विशेष महत्व है. पंचशूल को स्पर्श करने के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा. पंचशूल के नीचे उतरते ही जय शिव शंकर, हर हर महादेव के जयकारे लगने लगे. भोलेनाथ के विवाह को लेकर पूरे इलाके में हर्ष व उल्लास का माहौल है. भोलेनाथ की नगरी सज-धजकर तैयार हो रही है. बाजारों में भी रौनक बढ़ गयी है.

पंजशूल का किया गया विधि-विधान से पूजन

इधर, मंदिर के पुरोहितों ने बाबा के पंचशूल का विधिवत पूजन कर आर्शीवाद प्राप्त किया. विवाह से जुड़े सामग्रियों की खरीददारी की जा रही है. बाबा फौजदारी नाथ का धूमधाम से विवाह कराया जायेगा. मंदिर पुजारी प्रेमशंकर झा और मंदिर विदकरी ने बताया कि मंदिर प्रांगण में शनिवार को पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव एवं माता पार्वती के शादी के रस्म की शुरुआत होगी. मंदिर के गुंबद पर चढ़कर पंचशूल उतारने और पुनः स्थापित करने का विशेष अधिकार केवल विदकरी शौखी कुंवर के परिवार के पास है.

शनिवार को बाबा को लगेगी हल्दी, चढ़ेगा लावा कांसा

बाबा फौजदारीनाथ और मैया पार्वती को विदकरी द्वारा हरिद्रालेपन सगनौती किया जायेगा. भगवान शिव और मैया पार्वती पर लावा कांसा चढ़ाया जायेगा, उबटन लगाया जायेगा. मंदिर प्रांगण में इस अवसर पर महिलाओं द्वारा विवाह मंगलगीत गाये जायेंगे. पंडित सुधाकर झा ने बताया कि शिव-पार्वती के मिलन के समय गठबंधन को खोलने और फिर नई आस्था के साथ पंचशूल को वापस स्थापित करने की परंपरा है, जो सालों से चलती आ रही है. विवाह से एक दिन पूर्व अधिवाश होता है. बाबा के गुंबद पर से सोने चांदी के कलश व त्रिशूल को नीचे उतारा गया. बाबा फौजदारीनाथ और माता पार्वती को शनिवार को पूरे विधि विधान के साथ सोना, चांदी, काजल, वस्त्र, अलता, दूर्वा आदि चढ़ाया जायेगा. मंदिर पुरोहित और विधिकरी शौखी कुंवर द्वारा विवाह के रश्म पूरे किये जायेंगे. महाशिवरात्रि पर व्रती महिला पुरुष नहाय खाय के साथ शनिवार को संयत करेंगे.

शिव-पार्वती का गठबंधन खुला

पंचशूल उतरने के बाद से बाबा और पार्वती मंदिर का गठबंधन भी बंद हो गया. अब पंचशूल की विशेष पूजा होने के बाद उसे मंदिर के शिखर पर लगाया जाएगा. इसके बाद गठबंधन शुरू किया जाएगा. भगवान शिव व माता पार्वती मंदिर का गठबंधन शुक्रवार को खोला गया. इस खुले हुए गठबंधन को प्रसाद स्वरूप पाने के लिए भक्तों की भीड़ लगी. मान्यता है कि इस गठबंधन के प्रसाद को यदि किसी शादी योग्य लड़की व लड़का के गले में पहनाया जाये तो उसकी शादी जल्दी होती है. गुंबद पर से उतारे गये पंचशूल, कलश व त्रिशूल को साफ-सुथरा कर महाशिवरात्रि के दिन विदकरी फुलेश्वर कुंवर व उसके परिवार के सदस्यों द्वारा गुंबद पर चढ़ाया जायेगा. पंचशूल पांच तत्वों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का प्रतीक होता है. इसी कारण पंचशूल को सुरक्षा कवच भी माना जाता है, जो मंदिर को प्राकृतिक आपदाओं से बचाता है.

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