शहर में वैज्ञानिक तरीके से ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर 30 कांपैक्टर स्टेशन बनाने की योजना पर आधा-अधूरा ही काम हो पाया है. करीब नौ करोड़ रुपये की इस परियोजना में अब तक केवल 12 कांपैक्टर स्टेशन ही चालू हो सके हैं, जबकि 18 स्टेशन जमीन विवाद, स्थानीय विरोध और एनओसी नहीं मिलने से फाइलों में ही सिमटकर रह गये हैं. पिछले सात साल में मात्र 12 कांपैक्टर स्टेशन ही चालू हो पाये हैं. इनकी भी स्थिति खराब है. हीरापुर हटिया व स्टील गेट के पास बने कांपैक्टर स्टेशन में शटर गिरा हुआ है. वहीं धनसार में कांपैक्टर स्टेशन खुला है लेकिन प्रोसेसिंग नहीं हो रही है.
कचरा निस्तारण व्यवस्था की रीढ़ हैं कांपैक्टर स्टेशन
नगर निगम के लिए कांपैक्टर स्टेशन कचरा निस्तारण व्यवस्था की रीढ़ है. घर-घर से संग्रहित कचरे को पहले इन स्टेशनों तक लाया जाता है, जहां उसे मशीनों के जरिए उसे कंप्रेस किया जाता है. अधिकारियों के अनुसार लगभग 10 टीपर कचरे को कंप्रेस कर एक ट्रक कचरे के बराबर बनाया जाता है. इसके बाद उसे डंपिंग यार्ड तक पहुंचाया जाता है.