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Home झारखण्ड धनबाद Dhanbad News : देहो न करम गोसाई आशीष हो.. गीत पर झूमे जवैती दल

Dhanbad News : देहो न करम गोसाई आशीष हो.. गीत पर झूमे जवैती दल

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Dhanbad News : देहो न करम गोसाई आशीष हो.. गीत पर झूमे जवैती दल

करम अखाड़ा समिति सरायढेला की ओर से करम महोत्सव का आयोजन किया गया. इसमें 25 जवैती दलों ने करमा नृत्य प्रतियोगिता में भाग लिया.

उप मुख्य संवाददाता, धनबाद

प्रकृति पर्व करमा को लेकर मंगलवार को सरायढेला, स्टीलगेट, दामोदरपुर में पर्व की धूम रही. सरायढेला मंडप थान में करम अखाड़ा समिति सरायढेला की ओर से करम महोत्सव का आयोजन किया गया. इसमें 25 जवैती दलों ने करमा नृत्य प्रतियोगिता में भाग लिया और पारंपरिक गीत-नृत्य प्रस्तुत किये. कार्यक्रम में करम डाल को गाड़ने के बाद जवैती दलों ने बीच में जावा रखकर गीत व नृत्य प्रस्तुत किया. इस दौरान युवतियों ने करमा करम कह लेगे आयो, करमा कर दिना कैसे आवे हो…, भादो कर एकादशी करम गड़ाय हो, द्वितिया रथ चलाय हो… आदि करम गीत पर मोहक नृत्य किया. कार्यक्रम स्थल पर काफी संख्या में दर्शक व समाज के लोग उपस्थित थे. महोत्सव में शामिल सभी जवैती दलों को पुरस्कृत किया गया.

ये थे

उपस्थित

कार्यक्रम में पूर्व पार्षद गणपत महतो, हीरालाल महतो, श्रीराम महतो, गोपाल महतो, सुदीप महतो, हरि महतो, तारा रजवार, मोहन महतो, अमित महतो, रंजीत महतो, लाली महतो अविनाश महतो, अमर रजावर, विष्णु देव, मुखिया महतो, संतोष महतो, वरुण महतो आदि उपस्थित थे.

बहनें आज रखेंगी उपवास

बुधवार को बहनें निर्जल उपवास रख शाम को करम गोसाई की पूजा-अर्चना करेंगी. अपने भाई की लंबी आयु व स्वस्थ रहने के लिए आशीष मांगेगी. वहीं मंगलवार को बहनों ने नहाय खाय के साथ उपवास पूरा करने का संकल्प लिया.

भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है करमा पर्व

करमा प्रकृति पर्व है, यह भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है. करमा में जवा डाली की पूजा की जाती है. उसमें सात प्रकार के अनाज बोकर कड़े नियम का पालन करती हैं. नियम से जवा डाली में पानी दिया जाता है. एकादश के दिन बहनें उपवास कर करम डाल की पूजा करती हैं. जवा डाली को रात में जगाती हैं. इस दौरान आइज रे करम गोसाई घरे दुआरे, काल रे करम गोसाई कांसाई नदी पारे… आदि गीत गाकर जागरण करती है. नव वधुओं के लिए करम पर्व खास होता है. वे ससुराल से मायके करम डाल भेजती हैं. भाई बहन को लाने उसके ससुराल जाते हैं. सभी बहनें मिलकर जवा नाचने वाले स्थल पर झूमर खेलती हैं. सुबह करम गोसाई की पूजा कर भूल चूक की माफी मांग कर नदी या पोखर में विसर्जित करती हैं. भाई को प्रसाद देने के बाद उपवास खोलती हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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