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बीबीएमकेयू के 36 कॉलेजों में बांग्ला विषय में नामांकन के लिए नहीं आये एक भी आवेदन

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बीबीएमकेयू के 36 कॉलेजों में बांग्ला विषय में नामांकन के लिए नहीं आये एक भी आवेदन

सत्र 2024-28 के लिए जारी है नामांकन प्रक्रिया, अब तक दो बार मांगे जा चुके हैं आवेदनविश्वविद्यालय में पीजी बांग्ला विभाग में हैं सिर्फ 13 विद्यार्थी

अशोक कुमार, धनबाद.

बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले 13 अंगीभूत और 23 संबद्ध डिग्री कॉलेजों में यूजी सत्र 2024-28 के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है. इन कॉलेजों में नामांकन के लिए अब तक दो बार आवेदन आमंत्रित किये जा चुके हैं. लेकिन बांग्ला विषय में नामांकन के लिए एक भी आवेदन नहीं आये है. पिछले वर्ष कुछ संबद्ध कॉलेजों में बांग्ला में नामांकन के लिए आवेदन आये थे. इस वर्ष किसी भी संबद्ध कॉलेज में आवेदन नहीं आया है.

धनबाद व बोकारो में बांग्ला भाषियों की बड़ी आबादी है. बावजूद उच्च शिक्षा में बांग्ला के प्रति छात्रों में उदासीनता चिंता का विषय है. बीबीएमकेयू में यूजी स्तर पर पूरे विवि में 50 से भी कम छात्र रह गये हैं. ये छात्र यूजी थर्ड सेमेस्टर से लेकर सेमेस्टर सिक्स में पढ़ रहे हैं. विवि में पीजी बांग्ला विभाग में काफी कम छात्र हैं. पीजी सेमेस्टर फोर में अभी सात छात्र और सेमेस्टर टू में सिर्फ छह छात्र हैं, जबकि हर सेमेस्टर में बांग्ला में 32 सीटें हैं. विवि के बांग्ला विभाग में 13 छात्रों पर चार शिक्षक कार्यरत हैं.

यूजी में तीन कॉलेजों में हैं बांग्ला के आठ शिक्षकविवि के तीन अंगीभूत कॉलेजों में बांग्ला विषय में एक-एक शिक्षक हैं. लेकिन तीनों कॉलेजों में इस विभाग में एक भी छात्र नहीं है. इन कॉलेजों में पीके रॉय मेमोरियल कॉलेज, आरएस मोर कॉलेज गोविंदपुर और सिंदरी कॉलेज सिंदरी शामिल हैं.

वजह : बांग्ला भाषी छात्रों का बंगाल क्षेत्र से रुक गया है आनाविवि के बांग्ला विभाग के अध्यक्ष डॉ जयगोपाल मंडल बताते हैं कि पहले बांग्ला की पढ़ाई के लिए बंगाल से काफी छात्र आते थे. बंगाल सरकार ने हाल के वर्षों में धनबाद व बोकारो के सीमावर्ती क्षेत्रों में तीन नये विवि खोल दिये हैं. अधिकतर कॉलेजों में पीजी की भी पढ़ाई हो रही है. इसलिए वहां के छात्र अब यहां नहीं आ रहे हैं. दूसरी बड़ी वजह विवि की नीति में बदलाव है. पहले विवि में बांग्ला और उर्दू पढ़ने वाले छात्रों को माइनर विषयों की परीक्षा अपनी भाषा में देने की अनुमति थी. अब विवि ने इस पर रोक लगा दी है. अब इन विषयों के छात्रों को मेजर पेपर छोड़कर माइनर विषयों की परीक्षा हिंदी या इंग्लिश में देनी होती है. ऐसे में बांग्ला या दूसरा लैंग्वेज पेपर पढ़ने वाले छात्रों को परेशानी होती है. डॉ मंडल तीसरी बड़ी वजह बांग्ला भाषियों में अपनी भाषा सीखने के प्रति उदासीनता को मानते हैं. वह बताते हैं कि यह उदासीनता स्कूल स्तर से ही देखने को मिल रही है. पहले प्राइवेट स्कूलों में बांग्ला की पढ़ाई होती थी. छात्रों की कमी के कारण इसे बंद कर दिया गया है. अगर यह स्थिति रही तो वह दिन दूर नहीं जब बीबीएमकेयू में बांग्ला की पढ़ाई बंद हो जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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