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Dhanbad News: नये साल में धनबाद कोयलांचल से मिथेन गैस का भी होगा उत्पादन

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Dhanbad News: नये साल में धनबाद कोयलांचल से मिथेन गैस का भी होगा उत्पादन

धनबाद.

नये साल में धनबाद कोयलांचल की धरती से कोयले का साथ मिथेन गैस का भी उत्पादन संभव है. इस दिशा में बीसीसीएल व गुजरात की निजी कंपनी प्रभा एनर्जी तेजी से काम कर रही है. बता दें कि धनबाद की धरती में कोयले के साथ गैसीय ऊर्जा के रूप में अथाह सीबीएम संचित है. वर्तमान में झरिया के मुनीडीह से सीबीएम दोहन के लिए गुजरात की निजी कंपनी प्रभा एनर्जी काम में जुटी है. यहां से जल्द ही मिथेन गैस का उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है. यहां से उत्पादित गैस को प्रधानमंत्री गंगा ऊर्जा पाइप लाइन से जोड़ने की योजना है.

विदित हो कि बीसीसीएल की ज्यादातर खदानें गैसीय हैं. तकरीबन 28 भूमिगत खदानें डिग्री टू एवं डिग्री थ्री ग्रेड में हैं. यानी इनमें मिथेन की काफी मात्रा है. सीबीएम उत्पादन के लिए वर्जिन सीम तक बोर होल किया गया है. बोर होल नंबर दो की गहराई 1071.30 मीटर तक है, जबकि माइनिंग महज तीन सौ मीटर के आसपास ही सीमित है. माइनिंग के जानकार बताते हैं कि लंबे समय तक मिथेन गैसीय ऊर्जा के रूप में कोयलांचल को समृद्ध करता रहेगा. कल कारखानों के लिए उद्यमियों को आकर्षित करेगा.

सितंबर 2021 में हुआ था समझौता

कोयला भंडार से मिथेन गैस निकालने के लिए 20 सितंबर 2021 को बीसीसीएल व गुजरात की कंपनी प्रभा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता हुआ था. कोल इंडिया की सीबीएम दोहन के कॉमर्शियल प्रोजेक्ट का यह पहला एग्रीमेंट है. झरिया सीबीएम ब्लॉक के लिए डेवलपर वैश्विक निविदा के आधार पर चुना गया था. सीएमपीडीआइ की पीआइए के रूप में यह पहली परियोजना है.

झरिया सीबीएम ब्लाॅक-वन से सबसे पहले मिथेन गैस का उत्पादन

मिथेन गैस निकालने के लिए बीसीसीएल व प्रभा एनर्जी के साथ एमडीओ मोड में 30 वर्षाें का करार हुआ है. इसके मुताबिक उक्त कंपनी को बीसीसीएल के मुनीडीह स्थित झरिया सीबीएम ब्लाॅक-वन से मिथेन गैस का उत्पादन करना है. यहां से उत्पादित मिथेन को गेल गैस लिमिटेड की ऊर्जा गंगा पाइपलाइन के जरिए देश के किसी भी काेने में पहुंचाया जा सकेगा. यह पाइपलाइन मुनीडीह से महज आठ किमी की दूरी से गुजर रही है. झरिया सीबीएम ब्लाॅक-1 से मिथेन उत्पादन शुरू करने के लिए प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट को बीसीसीएल बोर्ड ने पहले ही मंजूरी दे दी है. कोल बेस्ड मिथेन गैस का उत्पादन शुरू करने को लेकर पर्यावरण स्वीकृति मिल गयी है. प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिलने के बाद बीसीसीएल ने कोयला उत्पादन के साथ गैस उत्पादन की दिशा में भी कदम बढ़ा दिया है.

देशभर में सीबीएम के 15 ब्लॉक, मुनीडीह प्रोजेक्ट सबसे पहला

2023-24 तक 50 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस उत्पादन का लक्ष्य है. छह राज्यों में 8500 वर्ग किमी क्षेत्र में सीबीएम के 15 ब्लॉक की पहचान की गई. उनमें से तीन झरिया, बोकारो ईस्ट एंड वेस्ट व नाॅर्थ कर्णपुरा झारखंड में हैं. इसमें बीसीसीएल का मुनीडीह प्राेजेक्ट सबसे पहला है. वेस्टर्न झरिया एरिया का 26.5 वर्ग किलोमीटर एरिया कोल बेड मिथेन गैस का भंडार है. माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर मोड (एमडीओ ) पर बीसीसीएल सीबीएम प्राेजेक्ट के लिए जमीन उपलब्ध करायेगी. इस मद में कंपनी के करीब 368.58 कराेड़ रुपये खर्च होंगे. बाकी खर्च, करीब 1510.5 करोड़ रुपये ठेका कंपनी वहन करेगी. कुल मिलाकर यह प्रोजेक्ट 1880 करोड़ रुपये का है. प्राेजेक्ट के रेवेन्यू शेयरिंग काॅन्ट्रैक्ट के तहत प्रोफिट में से 10 प्रतिशत राशि बीसीसीएल काे मिलेगी. जानकारी के मुताबिक, सीबीएम प्राजेक्ट तीन फेज में लागू किया जायेगा.

क्लीन एनर्जी उत्पादन के साथ राजस्व भी बढ़ेगा : सीएमडी

बीसीसीएल के सीएमडी समीरन दत्ता ने कहा कि मिथेन गैस का दाेहन शुरू हाेने से क्लीन एनर्जी का उत्पादन हाेगा. यह ग्लोबल वार्मिंग रोकने में कारगर होगा. बीसीसीएल काे आय का बड़ा स्रोत मिलने से राजस्व में वृद्धि हाेगी. आयात पर निर्भरता घटेगी. मिथेन के दोहन के बाद खदान गैसीय माइन नहीं रहेगी. गैस का रिसाव व हादसाें की आशंका शून्य हाे जायेगी. पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सकेगा.

संशोधित झरिया मास्टर प्लान को मिलेगी कैबिनेट की मंजूरी

नये साल 2025 में संशोधित झरिया मास्टर प्लान को कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है. मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद यहां संशोधित मास्टर प्लान (जेएमपी) के क्रियान्वयन पर तेजी से काम शुरू हो जायेगा. भू-धंसान व अग्नि प्रभावित उन जगहों को प्राथमिकता दी जायेगी, जहां मानव जीवन को तत्काल खतरा है. झरिया क्षेत्र में कुल 595 अग्नि प्रभावित क्षेत्र हैं. इनमें 81 क्षेत्र अति संवेदनशील हैं. पहले चरण में 81 सबसे संवेदनशील क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया गया है. जहां से सबसे पहले लोगों को बीसीसीएल व जेआरडीए प्राथमिकता के आधार पर शिफ्ट करायेगी. जेआरडीए के आंकड़ों के मुताबिक 81 अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में 14,460 परिवार रहते हैं. इनमें 1,860 रैयत व करीब 12,600 परिवार अवैध कब्जेधारी हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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