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Home झारखण्ड धनबाद जब धर्म की हानि होती है तब अवतार लेते हैं परमात्मा : निरजानंद शास्त्री

जब धर्म की हानि होती है तब अवतार लेते हैं परमात्मा : निरजानंद शास्त्री

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जब धर्म की हानि होती है तब अवतार लेते हैं परमात्मा : निरजानंद शास्त्री

धनबाद.

मानस प्रचार समिति मानस मंदिर जगजीवन नगर के 52वें मानस अधिवेशन की नौ दिवसीय शृंखला के तीसरे दिन परायण में देवी प्रसाद पांडे ने रामविवाह का प्रसंग सुनाया. इस दौरान विवाह के गीत गाए गये. राम कथा में मानस किंकर निरजानंद शास्त्री ने श्रीराम जन्म का प्रसंग सुनाया गया. इस दौरान श्रद्धालु सोहर गीत पर झूम उठे. विशिष्ट अतिथि डॉ आरएन राय, डॉ पीके सिन्हा, डॉ प्रदीप कुमार राय, विनीत कुमार सिन्हा, प्रबंधक कार्मिक केंद्रीय चिकित्सालय, अशोक पांडे सेक्रेटरी बिल्डर्स एसोसिएशन आदि ने उनका आशीर्वाद लिया. महाराज श्री ने बताया कि मानव में मानवता का संचार करने के लिए भगवान लेते हैं. परमात्मा की अवतार लेने के अनेक कारण है, किंतु रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने पांच कारण बताये हैं. पहला जय-विजय, दूसरा सती वृंदा जालंधर, तीसरा नारद का श्राप, चौथा मनुषत्रुपा की तपस्या व पांचवां कारण प्रतापभानु की कथा. मंच संचालन निशांत नारायण ने किया. अध्यक्षीय भाषण निरंजन सिंह ने दिया. सचिव विनोद दुबे ने धन्यवाद ज्ञापन किया. मौके पर समिति के योगेंद्र मिश्र, काजल दांगी, अभय झा, विंध्याचल पांडे, नरेश यादव, मनीष चौबे, आरएल यादव समेत गणमान्य लोग उपस्थित थे.

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