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सीपीआरएमएस-एनइ के फंड में एकमुश्त रकम नहीं मिली तो बंद हो जायेगी स्कीम

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सीपीआरएमएस-एनइ के फंड में एकमुश्त रकम नहीं मिली तो बंद हो जायेगी स्कीम

कोल इंडिया कंट्रीब्यूटरी पोस्ट रिटायरमेंट मेडिकल स्कीम (सीपीआरएमएस-एनई) के फंड की स्थिरता के लिए गठित कमेटी की दूसरी बैठक मंगलवार को एसइसीएल मुख्यालय बिलासपुर में हुई. अध्यक्ष एसइसीएल के ही सीएमडी डॉ प्रेम सागर मिश्रा ने की. इसमें सीपीआरएमएस-एनई स्कीम के तहत गठित फंड की स्थिति, प्रबंधन और सदस्यों के योगदान, योजना की स्थिरता आदि से संबंधित मुद्दों पर विचार किया गया. इस दौरान बताया गया कि फंड में एकमुश्त रकम नहीं मिलेगी, तो 2031 के बाद स्कीम बंद हो जायेगी. इससे रिटायर्ड कर्मचारियों के इलाज में परेशानी होगी. इसलिए सीपीआरएमएस एनई के फंड को मजबूत करने के लिए प्रबंधन द्वारा एक मुश्त रकम दी जायेगी. साथ ही फंड की मजबूती के लिए प्रबंधन का अंशदान निरंतर बना रहेगा. इससे भविष्य में जो भी कर्मी इस स्कीम का सदस्य बनेंगे, उनका और प्रबंधन का योगदान बढ़ाने का आग्रह किया जायेगा. इसको लेकर बैठक में सहमति बनी है. बैठक में लिए गये निर्णय की अनुशंसा को मानकीकरण कमेटी में प्रस्तुत किया जायेगा. मानकीकरण कमेटी में मुहर लगने का बाद फंड में प्रबंधन का अंशदान जमा होने लगेगा.

हरेक वेतन समझौते के बाद होगी स्कीम की समीक्षा :

नये वेतन समझौते के बाद शामिल होने वाले कर्मियों के साथ करने का प्रस्ताव दिया गया है. इस स्कीम को आगे और प्रभावी बनाने के लिए हरेक वेतन समझौते के बाद समीक्षा होनी चाहिए. बैठक में सामान्य बीमारी के इलाज के लिए आठ लाख रुपये तक सहयोग देने की बात उठी. वहीं विशेष बीमारी की स्थिति में यह खर्च असीमित हो सकती है. बैठक में प्रबंधन की ओर से एमसीएल के डीपी केशव राव, डब्ल्यूसीएल के डीएफ विक्रम घोष, सीसीएल के सीएमएस डॉ सुमन सिंह, कोल इंडिया के कार्यकारी निदेशक (वित्त) एसके मेहता व जीएमपी गौतम बनर्जी आदि शामिल हुए. जबकि यूनियन की ओर से सीटू से डीडी रामनंदन, एचएमएस से रणविजय सिंह, बीएमएस से राजकुमार सिंह, एटक से सतीश कुमार केसरी आदि उपस्थित थे.

अधिकारियों की तरह कर्मचारियों को भी मिले मेडिकल सुविधा :

बैठक में उपस्थित एचएमएस के प्रतिनिधि रणविजय सिंह ने सीपीआरएमएस-एनई स्कीम का लाभ रिटायर्ड कोलकर्मियों को भविष्य में भी जारी रखने की मांग की. साथ ही अधिकारियों की तहत ही कोल कर्मचारियों को भी रिटायरमेंट के पश्चात मेडिकल सुविधा देने की मांग प्रमुखता से रखी. श्री सिंह ने कहा कि वर्तमान में जहां रिटायर्ड अधिकारियों को 25 लाख तक मेडिकल सुविधा मिलती है. वहीं कोलकर्मियों को महज 8 लाख तक ही मेडिकल सुविधा मिल रहा है. जिसे बढ़ाने की मांग की.

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