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Dhanbad News: बिजली की मांग 300 मेगावाट के पार पहुंची, रोटेशन पर सप्लाई व्यवस्था

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Dhanbad News: बिजली की मांग 300 मेगावाट के पार पहुंची, रोटेशन पर सप्लाई व्यवस्था

भीषण गर्मी में बिजली की मांग में अचानक बढ़ोतरी ने जेबीवीएनएल की व्यवस्था को हिला कर रख दिया है. ओवरलोड के कारण शहर में रोटेशन के आधार पर बिजली आपूर्ति की जा रही है. इससे आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है. रविवार देर शाम से शुरू हुआ यह संकट सोमवार को भी पूरे दिन जारी रहा. स्थिति यह रही कि सोमवार को दिन के 11 बजे के बाद से शहर के कई इलाकों में हर आधे घंटे पर बिजली दी जा रही थी और उतनी ही देर के लिए कटौती की जा रही थी. बिजली कटौती के कारण भीषण गर्मी में एसी, पंखे और कूलर बंद होने से घरों में रहना मुश्किल हो गया है. छोटे बच्चों, बुजुर्गों व बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है.

रोटेशन सिस्टम से दिनभर झेलनी पड़ रही कटौती

बिजली विभाग की ओर से लोड को नियंत्रित करने के लिए रोटेशन प्रणाली अपनायी गयी है. ऐसे में हर आधे घंटे पर बिजली की कटौती के कारण न तो लोगों को घरों में चैन मिल रहा है और न ही व्यावसायिक गतिविधियां सुचारू रूप से चल पा रही हैं. पानी की सप्लाई, मोबाइल चार्जिंग, पढ़ाई और घरेलू काम सभी पर असर पड़ा है. खासकर दिन के समय जब तापमान चरम पर होता है, तब बिजली कटने से समस्या और बढ़ जा रही है. फिलहाल, जेबीवीएनएल के अधिकारी व्यवस्था को सामान्य करने में जुटे हैं, लेकिन रोटेशन आधारित सप्लाई ने यह साफ कर दिया है कि मौजूदा सिस्टम बढ़ते लोड को संभालने में सक्षम नहीं है.

ओवरलोड से ट्रांसफॉर्मर व केबल में आ रही खराबी

जानकारी के अनुसार अत्यधिक लोड के कारण जेबीवीएनएल के केबल व अन्य उपकरणों पर दबाव बढ़ गया है. कई जगहों पर ट्रांसफॉर्मरों के फ्यूज उड़ने व तकनीकी खराबी की समस्या आने की सूचनाएं आ चुकी हैं. इससे बिजली बाधित हो रही है और विभाग को बार-बार मरम्मत करना पड़ रहा है. शहर के सरायढेला, हीरापुर, कुसुम विहार, हाउसिंग कॉलोनी, धैया, जोड़ाफाटक और गोधर समेत कई सबस्टेशन ओवरलोड की समस्या से जूझते रहे. इन क्षेत्रों में सबसे अधिक बिजली प्रभावित हो रही है.

तेनुघाट यूनिट से मिल रही कम बिजली

रविवार को तेनुघाट स्थित पावर जेनरेशन यूनिट में अचानक तकनीकी खराबी आने से भी जेबीवीएनएल की मुश्किले बढ़ गयी हैं. तेनुघाट ग्रिड से जेबीवीएनएल के गोविंदपुर स्थित कांड्रा ग्रिड को बिजली मिलती है. तकनीकी खराबी के कारण रविवार शाम से धनबाद को होने वाली बिजली आपूर्ति लगभग ठप हो गयी है. ऐसे में धनबाद वर्तमान में डीवीसी की बिजली पर पूरी तरह निर्भर हो चुका है. अधिकारियों के अनुसार तेनुघाट पावर जेनरेशन यूनिट में आयी खराबी को दूर करने में दो दिन लग सकते हैं.

जिले में क्या है बिजली का गणित

जेबीवीएनएल एरिया बोर्ड अंतर्गत धनबाद और चास सर्किल में डीवीसी की बिजली सप्लाई होती है. धनबाद सर्किल में डीवीसी की ओर से सप्लाई के लिए 110 से 130 मेगावाट बिजली दी जाती है. वहीं चास सर्किल में सप्लाई के लिए 80-100 मेगावाट बिजली डीवीसी देती है. हाल के दिनों में धनबाद सर्किल के पास कांड्रा ग्रिड दूसरा विकल्प के रूप में उभरा है. तेनुघाटन स्थित एनटीपीसी के पावर जेनरेशन यूनिट से कांड्रा ग्रिड तक बिजली पहुंचती है. यहां से धनबाद को 30 से 50 मेगावाट बिजली मिलती है. जबकि, चास सर्किल अब भी डीवीसी से मिलने वाली बिजली पर निर्भर है.

जिले में तेजी से बढ़ रही बिजली की मांग

पिछले कुछ सालों से जिले में उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. तीन साल पहले धनबाद में उपभोक्ताओं की संख्या लगभग साढ़े चार लाख थी, जो अब छह लाख के पार हो चुकी है. वहीं बिजली की खपत भी 40 प्रतिशत, लगभग 100 मेगावाट तक बढ़ी है. मांग ज्यादा होने से वर्तमान में डीवीसी से मिलने वाली 230 मेगावाट बिजली की कम पड़ रही है. जेबीवीएनएल के अधिकारियों के अनुसार धनबाद को वर्तमान में करीब 300 मेगावाट बिजली की जरूरत है.

डीवीसी से नहीं मिल रही अतिरिक्त बिजली

जेबीवीएनएल एरिया बोर्ड अंतर्गत धनबाद व चास सर्किल में सप्लाई के लिए कुल 300 मेगावाट बिजली की आवश्यकता है. करार के अनुसार डीवीसी से 210 से 230 मेगावाट मिल रही है. बढ़ती मांग को देखते हुए मुख्यालय स्तर पर डीवीसी से अतिरिक्त बिजली मुहैया कराने को कहा गया. लेकिन अबतक डीवीसी द्वारा इस ओर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

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