[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home झारखण्ड धनबाद Dhanbad News: धनबाद में मजदूरों का हक मार रहीं 13 कंपनियां, डकार गईं 6 करोड़ का लेबर सेस

Dhanbad News: धनबाद में मजदूरों का हक मार रहीं 13 कंपनियां, डकार गईं 6 करोड़ का लेबर सेस

0
Dhanbad News: धनबाद में मजदूरों का हक मार रहीं 13 कंपनियां, डकार गईं 6 करोड़ का लेबर सेस
धनबाद में लेबर सेस के बकाया का बड़ा मामला सामने आया.

धनबाद से शोभित रंजन की रिपोर्ट

Dhanbad News: झारखंड की कोयलानगरी धनबाद में लेबर सेस का बड़ा बकाया सामने आया है. श्रम विभाग के अनुसार, बीसीसीएल समेत कुल 13 कंपनियों पर 6 करोड़ 5 लाख 51 हजार 853 रुपये का लेबर सेस अब तक जमा नहीं किया गया है. इस बकाया की वजह से भवन और दूसरे निर्माण कार्यों में शामिल मजदूरों के लिए चलाई जा रही कई महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित हो रही हैं. इन कंपनियों में रियल एस्टेट, निर्माण और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से जुड़ी इकाइयां शामिल हैं. श्रम विभाग का कहना है कि समय पर सेस की वसूली नहीं होने से मजदूरों को मिलने वाली सरकारी सहायता में लगातार देरी हो रही है.

कानून के मुताबिक निर्माण लागत का 1% है लेबर सेस

श्रम विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी कंपनी या व्यक्ति द्वारा कराए गए निर्माण कार्य की कुल लागत का एक प्रतिशत लेबर सेस के रूप में जमा करना अनिवार्य है. यदि संबंधित कंपनी समय पर यह राशि जमा नहीं करती है, तो उसके खिलाफ नीलाम पत्र वाद दायर किया जाता है. इसके बाद बकाया राशि पर दो प्रतिशत प्रति माह की दर से ब्याज जोड़कर वसूली की जाती है. बावजूद इसके कई कंपनियां लंबे समय से सेस का भुगतान नहीं कर रही हैं.

मजदूर कल्याण की योजनाओं पर सीधा असर

लेबर सेस की राशि से भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकारों के लिए स्वास्थ्य सहायता, छात्रवृत्ति, विवाह सहायता, मातृत्व लाभ, औजार अनुदान और पेंशन जैसी योजनाएं संचालित की जाती हैं. सेस की वसूली नहीं होने से इन योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर परेशानी आ रही है. पात्र मजदूरों को समय पर लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनका आर्थिक और सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है.

इन कंपनियों पर है लेबर सेस का बकाया

श्रम विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार बीसीसीएल और दो अन्य कंपनियों पर सबसे अधिक 4 करोड़ 52 लाख 36 हजार 199 रुपये का बकाया है. इसके अलावा कई निजी और शैक्षणिक संस्थानों पर भी बड़ी रकम बकाया है. प्रभातम मॉल पर 29 लाख 82 हजार रुपये, अनिमेष ऑटोशॉपट पर 2 लाख 75 हजार 552 रुपये और लिजा होंडा (गोविंदपुर) पर 10 लाख रुपये बकाया हैं. राधा स्वामी डेवलपर पर 19 लाख 12 हजार 702 रुपये और प्रमिला व्यापार पर 3 लाख 63 हजार रुपये का सेस लंबित है.

रियल एस्टेट और शैक्षणिक संस्थान भी सूची में शामिल

मां वैष्णवी इंफ्रा पर 9 लाख 24 हजार रुपये, गहलौत डेवलपर पर 2 लाख 88 हजार रुपये और दून पब्लिक स्कूल पर 5 लाख रुपये का बकाया दर्ज है. वहीं माउंट लिटरा स्कूल पर भी 5 लाख रुपये का सेस जमा नहीं किया गया है. इसके अलावा, पाम इन पर 10 लाख रुपये, यशोवन टावर पर 15 लाख रुपये और आस्था लिविन टावर पर 30 लाख रुपये बकाया हैं. पारा मेडिकल कॉलेज पर भी 66 हजार 404 रुपये का सेस लंबित है.

कड़ी कार्रवाई के संकेत

श्रम विभाग का कहना है कि यदि तय समय में बकाया राशि जमा नहीं की गई, तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. नीलामी प्रक्रिया तेज की जाएगी और ब्याज सहित राशि वसूली जाएगी.

मजदूरों को राहत दिलाना प्राथमिकता

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि लेबर सेस की वसूली मजदूरों के हक से जुड़ा मामला है. इसका सीधा असर मजदूर कल्याण योजनाओं पर पड़ता है. ऐसे में प्रशासन की प्राथमिकता है कि जल्द से जल्द बकाया सेस की वसूली कर पात्र मजदूरों को उनका हक दिलाया जाए.

इसे भी पढ़ें: गुरुजी का विजन और बढ़ता जनाधार झामुमो की असली ताकत, 1973 में मनाया गया था पहला स्थापना दिवस

क्या कहते सहायक श्रमायुक्त

  • प्रश्न: सेस जमा नहीं करने वाली कंपनियों पर क्या कार्रवाई हो रही है?
  • उत्तर: सभी बकायेदार कंपनियों को नोटिस जारी किया गया था. जिन कंपनियों ने अब तक राशि जमा नहीं की है, उनके खिलाफ सर्टिफिकेट केस दायर किए गए हैं.
  • प्रश्न: समय पर सेस नहीं देने पर क्या प्रावधान है?
  • उत्तर: श्रम सेस अधिनियम के तहत निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं करने पर ब्याज, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है. पहले नीलाम पत्र वाद दायर किया जाता है और उसके बाद दो प्रतिशत प्रति माह ब्याज के साथ राशि वसूली जाती है.
  • प्रश्न: लेबर सेस क्यों लिया जाता है?
  • उत्तर: यह सेस निर्माण क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों के सामाजिक और आर्थिक कल्याण के लिए खर्च किया जाता है, ताकि उन्हें सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके.

इसे भी पढ़ें: Maha Shivaratri 2026: शिव बारात में हैकर दैत्य देगा साइबर फ्रॉड से बचने का संदेश, देवघर में महाशिवरात्रि की तैयारी शुरू

Previous article Premanand Ji Maharaj Quotes: जब कोई साथ न दे, तब क्या करें? प्रेमानंद जी महाराज से जानें अपने प्रश्नों का हल
Next article UGC NET Result 2026: आज जारी हो सकता है यूजीसी नेट रिजल्ट, जानें कहां और कैसे करें चेक
Avatar Of Kumarvishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel