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Home झारखण्ड धनबाद विपदतारिणी पूजा को लेकर कोयलांचल के मंदिरों में उमड़ीं श्रद्धालु

विपदतारिणी पूजा को लेकर कोयलांचल के मंदिरों में उमड़ीं श्रद्धालु

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विपदतारिणी पूजा को लेकर कोयलांचल के मंदिरों में उमड़ीं श्रद्धालु

कोयलांचल के मंदिरों में मंगलवार को मां विपदतारिणी की पूजा श्रद्धा व भक्ति के साथ की गयी. इस अवसर पर महिलाओं ने उपवास रखकर पूजा की और अखंड सुहाग, संतान की लंबी आयु परिवार की सुख-शांति की कामना की. पूजा को लेकर सुबह से ही महिलाओं की भीड़ मंदिरों में जुटने लगी थी. दुर्गा मंदिर कोयला नगर, हरि मंदिर समेत अन्य मंदिरों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने पूजा-अर्चना की. मंदिर के पुजारी धर्मदास गोस्वामी व हरिभजन गोस्वामी ने बताया कि आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष रथयात्रा के बाद पड़नेवाले मंगलवार या शनिवार को मां विपदतारिणी की पूजा की जाती है. पूजा को लेकर शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही जुटने लगी थी. महिलाओं ने 13 प्रकार के फल, फूल व मिठाइयों का भोग लगाकर मां की आराधना की. विपदतारिणी पूजा को लेकर शहर के पुराना बाजार स्थित काली मंदिर, हीरापुर हरि मंदिर, सरायढेला दुर्गा मंदिर, माझेरपाड़ा दुर्गा मंदिर, कोयला नगर मंदिर, मनईटांड़ हरि मंदिर समेत अन्य स्थानों पर चहल-पहल रही. महिलाओं ने मां की पूजा-आराधना कर कथा का श्रवण किया.

बंगाली समुदाय में पूजा को लेकर दिखा उत्साह :

विपतारिणी पूजा को लेकर खासकर बंगाली समुदाय में काफी उत्साह दिखा. हीरापुर दुर्गा मंदिर, हरि मंदिर में महिलाओं ने आस्था के साथ पूजा अर्चना की. दूर्वा दल से रक्षा सूत्र बनाकर मां को अर्पित करने के बाद उसे परिवार के सदस्यों की बाजू में बांधा.

मां दुर्गा का ही स्वरूप है मां विपदतारिणी :

शास्त्रों के अनुसार विपदतारिणी मां दुर्गा का ही रूप है. परिवार समाज में सुख-समृद्धि कायम रखने, बाधाओं को दूर करने विपत्ति, संकट से मुक्ति पाने के लिए महिलाओं के द्वारा यह व्रत किया जाता है. इस पर्व में फूल दुर्बा के अलावा 13 प्रकार के फल-फूल, मिष्ठान व पकवान के साथ मां की पूजा की जाती है. मौके पर महिलाओं द्वारा एक-दूसरे की मांग में सिंदूर तथा बांह में दूर्वा के साथ लाल रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा है.

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