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सत्संग सुनने से जीवन में होता है कल्याण : देवकीनंदन ठाकुर

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सत्संग सुनने से जीवन में होता है कल्याण : देवकीनंदन ठाकुर

फोटो है, 26 निरसा 6 में कथावाचक, 7 में कथी सुनती महिलाएं.

निरसा.

मनुष्य को हमेशा सत्संग को सुनना चाहिए. सत्संग को सुनने से मनुष्य का कल्याण होता है. भगवान का नाम रोज लेने से मनुष्य का कल्याण हो जाता हैं. जो भी मनुष्य सच्चे मन से भगवान का जाप और नाम नहीं लेता है. उस मनुष्य का कभी भी कल्याण एवं उद्धार कभी भी नहीं हो सकता है. हर मनुष्य को भगवान कृष्णा की पूजा करनी चाहिए. उक्त बातें शुक्रवार को निरसा के तिलतोड़िया में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन प्रसिद्ध कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कहा. उन्होंने कहा कि आज समाज में मित्र का दुश्मन मित्र ही बन गया है. आज मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए अपने मित्र की ही हत्या कर देता है. रामायण में भी कहा गया है कि जो लोग अपने मित्र का दुःख देखकर दुखी नहीं होते है ऐसे लोग को देखने से पाप लगता है. मित्र का धर्म होता है कि अगर उसका मित्र संकट में है तो वह अपने मित्र की रक्षा करें. भगवान श्री कृष्णा अपने भक्तों की रक्षा हमेशा करते है. मनुष्य को अपने हर कार्य को समय पर करना चाहिए, काम से फुर्सत मिलने पर मनुष्य को भगवान की भक्ति करनी चाहिए जिससे उसका कल्याण हो सकें.

जगत का कार्य करने के दौरान कभी जगदीश को न भूलें : अखिलेश चंद्र उपाध्याय : जोड़ापोखर.

जियलगोड़ा मानस मंदिर प्रांगण में 52वां वार्षिक नौ दिवसीय मानस महाधिवेशन के तीसरे दिन शुक्रवार को गाजीपुर उत्तर प्रदेश से पधारे कथा वाचक अखिलेश चंद्र उपाध्याय ने कहा कि मनुष्य का धर्म होता है कि जगत का कार्य करने के दौरान कभी जगदीश को न भूलें. रामचरित्र मानस समाज में रिश्ते बनाये रखने की नीति सिखाती है. तुलसीदास रामकथा लिखकरअमर हो गये. मुकेश कुमार रामायण पर आधारित गीत गाकर, रामानंद सागर रामायण सीरियल बनाकर अमर हो गये. यही रामायण की गुणवत्ता है. अयोध्या से पधारे बाल व्यास अशोकानंद तिवारी ने कहा कि राम के चरित्र को जीवन में उतारने की जरूरत है. इस अवसर पर सुबह परायणाचार्य पंडित अनिल पाठक की टीम द्वारा रामायण पाठ किया गया. पुजारी अशोक पाठक ने पूजा करायी. सुबह में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मंदिर की परिक्रमा की. मौके पर मानस सत्संग समिति के धर्मेंद्र राय, पिंटू अग्रवाल, जोगेंद्र सिंह, सिद्धेश्वर भारती, अनुभवक पंडित, धर्मवीर राय, बृजेश राय, सुनील वर्मा, शिव कुमार दुबे, उमेश सिंह, मोहन साव आदि थे.

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