धनबाद से मनोहर कुमार की रिपोर्ट
Coal India: देश की कोयला कंपनी कोल इंडिया ने अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) को नई दिशा देने का फैसला किया है. कंपनी वित्त वर्ष 2030 तक आरएंडडी पर करीब 1900 करोड़ रुपये खर्च करेगी. इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के जरिए कोयला उत्पादन बढ़ाना, सुरक्षित खनन को बढ़ावा देना और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी तकनीकों का विकास करना है.
एक साल में आरएंडडी पर चार गुना बढ़ा खर्च
कोल इंडिया ने वित्त वर्ष 2024-25 में नेशनल सेंटर फॉर कोल एंड एनर्जी रिसर्च (एनएसीसीइआर) की स्थापना की है. इसके बाद कंपनी ने सिर्फ शोध तक सीमित रहने के बजाय नई तकनीकों के प्रोटोटाइप तैयार करने और उन्हें जमीन पर उतारने की दिशा में काम तेज कर दिया है. कंपनी का आरएंडडी खर्च भी एक साल में चार गुना बढ़कर 61 करोड़ रुपये से 245 करोड़ रुपये पहुंच गया है. कंपनी ने आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी मद्रास और आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में तीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए है. इन केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से 253 करोड़ रुपये दिए जाएंगे.
रिसर्च और पायलट प्रोजेक्ट पर चल रहा है काम
कोल इंडिया में फिलहाल 19 बड़े अनुसंधान प्रोजेक्ट और 13 पायलट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. इनमें कोयला गैसीकरण, कार्बन कैप्चर, रेयर अर्थ मिनरल्स की रिकवरी, पर्यावरण संरक्षण, खदानों का फिर से उपयोग और आधुनिक खनन तकनीक पर शोध किया जा रहा है. कोल इंडिया ने कनाडा, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया की संस्थाओं के साथ भी तकनीकी साझेदारी की है. इसके तहत इसीएल में भूमिगत कोयला गैसीकरण, झांझरा भूमिगत खदान में 5जी तकनीक के इस्तेमाल और आधुनिक खनन अनुसंधान पर संयुक्त रूप से काम होगा. कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आरएंडडी को नई ऊंचाई पर ले जाकर कोल इंडिया को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है. इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, लागत घटेगी और सुरक्षित व टिकाऊ खनन को बढ़ावा मिलेगा.
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क्यों बढ़ा रही है कोल इंडिया R&D पर निवेश?
भारत की ऊर्जा जरूरतों में कोयले की अहम भूमिका है. बढ़ती मांग, पर्यावरणीय चुनौतियों और सुरक्षित खनन की आवश्यकता को देखते हुए कोल इंडिया ने अनुसंधान और विकास को अपनी दीर्घकालिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा बनाया है. कंपनी का लक्ष्य आधुनिक तकनीकों के जरिए उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना और खनन को अधिक सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाना है. इसके लिए स्वच्छ कोयला तकनीक, कोयला गैसीकरण, कार्बन कैप्चर, 5जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन पर तेजी से काम हो रहा है. आईआईटी जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित कर शोध को प्रयोगशाला से खदानों तक पहुंचाने की योजना है. वहीं कनाडा, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया के साथ तकनीकी सहयोग से वैश्विक स्तर की आधुनिक तकनीकों का लाभ मिलेगा. इन पहलों से उत्पादन क्षमता बढ़ने, दुर्घटनाएं घटने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने और भारतीय कोयला उद्योग को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी.
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