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धनबाद के बर्डमैन ने लिखी वसीयत- मृत्यु के बाद जंगलों में छोड़ दिया जाये मेरा शव

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धनबाद के बर्डमैन ने लिखी वसीयत- मृत्यु के बाद जंगलों में छोड़ दिया जाये मेरा शव

सेवानिवृत्ति बैंकर अखिलेश सहाय ने पक्षियों के संरक्षण में समर्पित कर दिया अपना बाकी जीवन

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वरीय संवाददाता, धनबाद

कहते हैं मानव शरीर पांच तत्वों से बना है. मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के माध्यम से शरीर को पांच तत्वों को लौटा दिया जाता है. लेकिन हमारे बीच भी कुछ ऐसे व्यक्ति हैं, जो मृत्यु के बाद भी अपने शरीर को समाज की बेहतरी के लिए दान कर देते हैं. लेकिन बरटांड़ के रहने वाले और धनबाद के बर्डमैन के नाम से मशहूर सेवानिवृत्त बैंकर अखिलेश सहाय की अंतिम इच्छा है मृत्यु के बाद अपने शरीर को प्रकृति को सौंप देने की. बैंक से सेवानिवृत होने के बाद श्री सहाय का अधिकतर समय जंगलों में पशु पक्षियों के बीच बीतता है. उन्होंने अपना बाकी जीवन पक्षियों के संरक्षण के समर्पित कर दिया है. मृत्यु के बाद भी वह अपने शरीर को इन्हीं पशु पक्षियों को समर्पित कर देना चाहते हैं. श्री सहाय ने प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी के के समक्ष अपना वसीयत कर अपनी अंतिम इच्छा प्रकट की है. उन्होंने अपने करीबियों को संबोधित करते हुए कहा है कि उनकी मृत्यु के बाद उनके प्रतिक शरीर का अंतिम संस्कार नहीं किया जाये. बल्कि उनके शव को साफ-सुथरे कपड़े में लपेटकर जंगल के बीच में रख दिया जाये. उन्होंने अपने शपथ पत्र में कहा है कि अगर उनका निधन धनबाद में होता है, तो उनके शव को धांगी पहाड़ी के ऊपर जंगल के बीच रख दिया जाये. अगर उनका निधन गुजरात में होता है, तो वहां पास के जंगल में शव को रखा जाये. उन्होंने चेन्नई में मिनांबकम हवाई अड्डे के पास स्थित जंगल का भी जिक्र किया है. कहा है कि अगर उनका निधन धनबाद के बाहर होता है, तो उनके शव को वहीं जंगल में रखा जाये. किसी भी सूरत में धनबाद नहीं लाया जाये.

मृत्यु भोज के लिए किया मना : अखिलेश सहाय ने अपनी अंतिम इच्छा के रूप में अपने परिवार वालों से श्राद्ध कर्म और मृत्यु भोज नहीं करने की इच्छा प्रकट की है. उनके निधन पर उन्होंने श्राद्ध के नाम पर 500 रुपये से अधिक खर्च करने के लिए मना किया है. उन्होंने गरीबों में इस पैसे से मिठाई बांटने के लिए कहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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