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परशुराम-लक्ष्मण संवाद का प्रसंग सुनकर भाव विभोर हुए श्रोता

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परशुराम-लक्ष्मण संवाद का प्रसंग सुनकर भाव विभोर हुए श्रोता

मधुपुर. शहर के पंच मंदिर रोड स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में चल रहे नवाह्न पारायण यज्ञ सह श्री राम कथा के सातवें दिन शुक्रवार को कथा वाचक मधुसूदन शास्त्री ने श्री राम जानकी विवाह का बड़ा ही मनमोहक वर्णन सुनाया. इसके पूर्व धनुष भंग और परशुराम लक्ष्मण संवाद का प्रसंग से भाव विभोर हुए श्रोता. शास्त्री जी ने बताया कि यह विवाह आज तक आदर्श विवाह के रूप में वर्णित होता है. वर राम व दुल्हन जानकी के रूप में देखे जाते है. हमारे लोकगीतों में यह स्पष्ट दिखाई पड़ता है. भगवान श्रीराम ने महाराज दशरथ से दहेज में यह मांगा की जो भी अयोध्या के अविवाहित विवाह योग्य युवा आये हैं उनका जनकपुरी में विवाह हो जाये तभी बारात वापस लौटेगी. उन्होंने कहा कि विवाह एक प्रसंग नहीं है यह आदर्श की पराकाष्ठा है. हमें श्रीराम जानकी के चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिए कि पति व्रत कैसे अपनाया जाता है. इस व्रत से नारी पूजनीय और उदाहरण बन जाती है. उन्होंने कहा कि सास अगर सीता जैसी बहू चाहती है तो स्वयं उसे कौशल्या बनना होगा. बहू कौशल्या जैसा सास चाहती है तो उसे सीता जैसा बनना होगा. यही आज के समय की जरूरत है जिसे ध्यान में रखा जाना चाहिए. जीवन में संस्कार को अपनाना चाहिए और परिवार को आदर्श बनाना चाहिए. मौके पर दर्जनों श्रद्धालु मौजूद थे.

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