भारत की आध्यात्मिक विरासत दुनिया को दिखा सकती है शांति का मार्ग : शंकराचार्य

स्वदेशी, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण पर शंकराचार्य का जोर

By SANJAY KUMAR RANA | May 31, 2026 7:45 PM

चितरा. चितरा कोलियरी स्थित दुखिया बाबा मंदिर प्रांगण में आयोजित श्री श्री 1008 महाविष्णु यज्ञ के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में सुमेर पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि भारत विश्व शांति का आधार है तथा सनातन वैदिक संस्कृति संपूर्ण मानवता को “वसुधैव कुटुंबकम ” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः ” का संदेश देती है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि सनातन परंपरा विश्व शांति, सद्भाव और समस्त सृष्टि के कल्याण की बात करती है. उनके अनुसार वेद मानव मात्र में एक ही आत्मा के दर्शन का संदेश देते हैं तथा विश्व में शांति और एकता स्थापित करने के लिए मानवीय मूल्यों को अपनाना आवश्यक है. शंकराचार्य ने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, किसानों और स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. उन्होंने लोगों से भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की. पर्यावरण संरक्षण के विषय में उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए पौधरोपण अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से कम से कम एक पौधे लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया. साथ ही स्वास्थ्य की दृष्टि से गौपालन को भी लाभकारी बताया. उन्होंने देश में समान शिक्षा नीति, समयबद्ध न्याय व्यवस्था तथा सभी नागरिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया. इसके अलावा अवैध घुसपैठ, धर्मांतरण और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी अपने विचार व्यक्त करते हुए सरकार से प्रभावी कदम उठाने की मांग की. शंकराचार्य ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपराएं और मानवीय मूल्य विश्व को शांति एवं सद्भाव का मार्ग दिखा सकते हैं. मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, यज्ञ समिति के सदस्य तथा स्थानीय गणमान्य लोग मौजूद थे. — प्रेस वार्ता में सुमेर पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने विश्व शांति का दिया संदेश सनातन वैदिक संस्कृति समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग : शंकराचार्य भारत विश्व शांति का आधार, सनातन संस्कृति देती है मानवता का संदेश : नरेंद्रानंद सरस्वती स्वदेशी अपनायें, पौधे लगायें और राष्ट्र को सशक्त बनायें : शंकराचार्य नरेंद्रानंद