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ट्यूशन नहीं पढ़ने पर बच्चों के अंकों से खेल

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ट्यूशन नहीं पढ़ने पर बच्चों के अंकों से खेल

प्राइवेट स्कूलों के टीचर के दबाव से अभिभावक परेशान इंट्रो : प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार के लोगों के लिए आर्थिक बोझ बनता जा रहा है. प्राइवेट स्कूलों में नामांकन के नाम पर पहले मोटी रकम वसूली जाती है. किताब, स्टेशनरी, यूनिफॉर्म आदि के खर्चे के लिए मुसीबत बन गया है. ऊपर से स्कूल के टीचर से ही ट्यूशन पढ़ाने का बोझ पैरेंट्स व गार्जियन के लिए मुसीबत बना हुआ है. प्रभात खबर के संवाददाता ने जीरो ग्राउंड पर पूरी पड़ताल की. पड़ताल में कई चौकाने वाला मामलों का खुलासा हुआ है. पूरी खबर सीरीज में पढ़ें. विजय कुमार, देवघर प्राइवेट स्कूलों की प्रसिद्धि के साथ-साथ यहां के अध्यापकों से ट्यूशन पढ़ाने का दबाव बढ़ रहा है, जिसपर ही विद्यार्थियों को परीक्षा में अच्छे नंबर मिलने की उम्मीदें टिकी रहती है. बच्चों को ट्यूशन दिलवाने के लिए प्राइवेट स्कूलों के टीचरों द्वारा उनके अंकों का दबाव बढ़ाया जा रहा है, जिससे अभिभावकों की आर्थिक व मानिसक परेशानी बढ़ गयी है. देवघर में प्राइवेट और निजी स्कूलों की संख्या गत वर्षों में तेजी से बढ़ रही है. जिले में दो दर्जन से ज्यादा सीबीएसइ बोर्ड व आइसीएसइ बोर्ड के स्कूलों का संचालन होता है. यहां नामांकित छात्रों की संख्या 50 हजार से ज्यादा है. पैरेंट्स व गार्जियन अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए महंगे स्कूलों में नामांकन कराते हैं. नामांकन आदि के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम तो वसूली ही जाती है और ऊपर से उनके अंदर ही टीचरों से ट्यूशन पढ़ाने का दबाव बना दिया गया है. अगर बच्चे ट्यूशन नहीं लेते हैं तो उन्हें परीक्षा में कम अंक देकर परेशान किया जाता है. प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों की बड़ी संख्या शामिल है, जिनके द्वारा बच्चों को अंक हासिल करवाने का खेल चल रहा है. प्राइवेट स्कूलों के पैरेंट्स व गार्जियन्स इस स्थिति से परेशान हैं और कई चौंकाने वाले तथ्यों का भी खुलासा किया है. उनका कहना है कि अगर उन्होंने टीचरों की मांगों को न माना तो उनके बच्चों को परेशान किया जाता है. ———– केस स्टडी : एक आइसीएसइ बोर्ड के स्कूल में पढ़ाई कर रहे एक बच्चे के पैरेंट्स ने बताया कि स्कूल के टीचर से ही ट्यूशन पढ़ाने के लिए लगातार दबाव बनाया जाता है. अगर कोई अपने बच्चों को स्कूल के टीचर से पढ़ाना नहीं चाहते हैं तो उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जाता है. थक-हार कर स्कूल के टीचर के पास ट्यूशन देने के लिए विवश होना पड़ता है केस स्टडी : दो मेरा बच्चा आइसीएसइ बोर्ड के स्कूल में पढ़ाई करता है. शुरू-शुरू में स्कूल के बाहर के टीचर से बच्चों की पढ़ाई कराते थे. लेकिन, परीक्षा में बच्चों को कम अंक देकर उनका प्रदर्शन को खराब बताया जाता था. फिर कुछ शिक्षकों की सलाह पर ही स्कूल के टीचर के पास बच्चों को पढ़ने भेजा तो उनका परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन होने लगा. केस स्टडी : तीन सीबीएसइ बोर्ड के स्कूल में बच्चा मेरा पढ़ाई करता है. स्कूल के टीचर से पढ़ाई कराने के नाम पर विभिन्न विषयों के लिए मोटी रकम हर महीने चुकता करना पड़ता है. इससे हर महीने आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता है. लेकिन, बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर चुप रहते हैं. केस स्टडी : चार सरकारी स्कूलों के मुकाबले सीबीएसइ बोर्ड के स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई ऐसे ही महंगी होती है. ऊपर से स्कूल के टीचर से ही प्राइवेट ट्यूशन देना किसी मुसीबत से कम नहीं होता है. अलग अलग विषय के लिए अलग अलग फीस निर्धारित किया गया है. ऐसे में बच्चों को नियमित रूप से विषयवार पढ़ाई नहीं करायी, जो तो बच्चे शैक्षणिक रूप से कमजोर हो जाते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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