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अहंकार मिटे तो हृदय में बसते हैं भगवान : कुलदीप कृष्ण महाराज

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अहंकार मिटे तो हृदय में बसते हैं भगवान : कुलदीप कृष्ण महाराज

चितरा. सहरजोरी शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन शनिवार रात श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत माहौल देखने को मिला. वृंदावन धाम से पधारे कथावाचक कुलदीप कृष्ण जी महाराज ने श्रीमद्भागवत की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि जहां अहंकार समाप्त होता है, वहीं भगवान का वास्तविक वास होता है. उन्होंने कहा कि परमात्मा प्रत्येक मनुष्य के अंतर्मन में निवास करते हैं, लेकिन अहंकार उस दिव्य अनुभूति में सबसे बड़ी बाधा बन जाता है. महाराज ने कहा कि जिस व्यक्ति के भीतर श्री का भाव जागृत हो जाता है, उसके जीवन में विनम्रता, प्रेम और भक्ति स्वतः आ जाती है. श्री केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली दिव्य शक्ति है. आत्मा ही मनुष्य को कर्म करने की शक्ति प्रदान करती है और आत्मा के बिना शरीर का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता. उन्होंने श्रीमद्भागवत को परमहंसों का दिव्य ग्रंथ बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति संसार के कण-कण में परमात्मा का दर्शन कर लेता है, वही सच्चे अर्थों में परमहंस कहलाता है. कथा के दौरान श्रद्धालुओं से भगवान के श्रीचरणों में समर्पित भाव रखने का आह्वान किया गया. उन्होंने कहा कि भागवत कथा मनुष्य के भीतर भाव जगाती है, जिससे भक्ति और सद्गुणों का विकास होता है. वहीं खून गांव के पुनर्वास स्थल बनवारी डंगाल में सात दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया. मौके पर पूर्व मंत्री रणधीर सिंह, शकुंतला देवी, ग्रामीण अशोक सिंह, दिलीप सिंह, जयनंदन सिंह, नवल सिंह, राजीव सिंह, रोहित सिंह, गणेश सिंह, सुधीर सिंह, परेश चंद्र सिंह, मुरारी सिंह, गौरव सिंह, सिंधु सिंह, विवेक सिंह, अनिल सिंह, भगवान बर्नवाल, दिलीप महतो आदि मौजूद थे.

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