बाबा पर गुलाल अर्पित होते ही देवघर में होली शुरू, अल सुबह 5:11 बजे होलिका दहन

Deoghar Holi: बाबा बैद्यनाथ धाम में बाबा पर गुलाल अर्पित होते ही होली की शुरुआत हुई. अल सुबह 5:11 बजे होलिका दहन किया गया. भव्य फगडोल, हरिहर मिलन और छप्पन भोग के साथ पूरी नगरी भक्ति व उल्लास के रंग में सराबोर रही. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

By KumarVishwat Sen | March 3, 2026 10:34 AM

Deoghar Holi: परंपरा के अनुसार बाबा बैद्यनाथ पर गुलाल अर्पित करते ही सोमवार से बाबा नगरी देवघर में होली की औपचारिक शुरुआत हो गई. इस परंपरा की शुरुआत मंदिर महंत सरदार पंडा श्रीश्री गुलाब नंद ओझा ने बाबा पर गुलाल अर्पित कर की. इसके साथ ही, भक्ति और उल्लास का ऐसा संगम बना कि पूरा मंदिर परिसर रंगों और जयकारों से गूंज उठा. परंपरा के तहत पूरी रात मंदिर का पट खुला रहा और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बाबा पर गुलाल अर्पित कर दर्शन किए. हालांकि, इस दौरान आम श्रद्धालुओं को शिवलिंग स्पर्श की अनुमति नहीं थी. इसके साथ ही, बाबा नगरी में अल सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर होलिका दहन किया गया.

शाम साढ़े चार बजे पट खलने के बाद शुरू हुई परंपरा

सोमवार को शाम करीब सवा चार बजे मंदिर का पट बंद किया गया. इसके बाद साढ़े चार बजे पट दोबारा खोला गया. सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा, पुजारी राकेश झा, पुरोहित दुर्गा प्रसाद एवं उपचारक भक्ति नाथ फलहारी गर्भगृह में प्रवेश किए. विधिवत शिवलिंग की सफाई कर मलमल के कपड़े से उसे पोंछा गया और फिर सरदार पंडा ने बाबा पर गुलाल अर्पित कर होली की शुरुआत की. इसके बाद श्रद्धालुओं ने भी बारी-बारी से बाबा को गुलाल अर्पित किया. यह सिलसिला पूरी रात चलता रहा.

निकला भव्य फगडोल, जयकारों से गूंजा शहर

गुलाल अर्पण की परंपरा के बाद राधा-कृष्ण मंदिर से भगवान कृष्ण और राधारानी को फगडोल पर विराजमान कराया गया. मंदिर के टहलुआ अरुण राउत, दीवान सोना सिन्हा और भंडारी टीम ने फगडोल को कंधे पर उठाया. जय कन्हैया लाल की, मदन गोपाल की जय के नारों के बीच फगडोल मंदिर की परिक्रमा करते हुए पश्चिम द्वार से बाहर निकला. इस दौरान रास्ते में सड़कों और मुहल्लों में पहले से प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालुओं ने भगवान पर गुलाल अर्पित कर नमन किया. हर चौक-चौराहे पर फगडोल रुकता रहा और भगवान को मालपुआ का भोग लगाया गया. मुख्य बाजार से गुजरते हुए फगडोल आजाद चौक स्थित दोल मंच पर पहुंचा, जहां पूरी रात भगवान कृष्ण और राधा को झुलाने की परंपरा निभाई जायेगी. शहरवासी यहां पहुंचकर गुलाल अर्पित कर भगवान को झुलायेंगे.

अल सुबह होलिका दहन, फिर हरिहर मिलन

तय तिथि के अनुसार, मंगलवार अल सुबह दोल मंच पर पुजारी दुर्गा प्रसाद करीब साढ़े चार बजे होलिका पूजन करेंगे और निर्धारित समय सुबह 5:11 बजे होलिका दहन किया गया. होलिका दहन के बाद भगवान हरि और राधा को दोबारा फगडोल पर सवार कर मंदिर लाया गया. इस बार फगडोल बाबा मंदिर के पूरब द्वार से प्रवेश किया. मंदिर प्रवेश होते ही राधारानी को भगवान के मंदिर में और भगवान हरि को सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा की मौजूदगी में गर्भगृह में हरि और हर का मिलन कराया गया.

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इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और गुलाल अर्पित कर इस मिलन का स्वागत किया. इसके बाद भितरखंड स्थित भगवान की विशेष पूजा और छप्पन भोग लगाया गया. इस दौरान सुबह करीब साढ़े छह बजे बाबा का शृंगार पूजा कर पट को बंद कर दिया गया. सवा सात बजे पट दोबारा खोलकर कांचाजल पूजा और सरदारी पूजा के बाद आम भक्तों के लिए करीब नौ बजे से जलार्पण शुरू कर दिया गया. इस परंपरा को बाबा के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है.

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