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Home झारखण्ड देवघर देवघर एम्स में शुरू हुआ अत्याधुनिक ब्लड बैंक, सांसद निशिकांत दुबे ने किया उद्घाटन

देवघर एम्स में शुरू हुआ अत्याधुनिक ब्लड बैंक, सांसद निशिकांत दुबे ने किया उद्घाटन

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देवघर एम्स में शुरू हुआ अत्याधुनिक ब्लड बैंक, सांसद निशिकांत दुबे ने किया उद्घाटन
देवघर एम्स में ब्लड बैंक का उद्घाटन करते सांसद डॉ निशिकांत ठाकुर. फोटो: प्रभात खबर

देवघर से अमरनाथ पोद्दार की रिपोर्ट

Deoghar AIIMS: देवघर एम्स में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. मंगलवार को गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने 1,000 यूनिट क्षमता वाले अत्याधुनिक ब्लड बैंक का विधिवत उद्घाटन किया. इस नई सुविधा के शुरू होने से झारखंड ही नहीं बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. यह ब्लड बैंक आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक मशीनों से सुसज्जित है, जिससे गंभीर और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त और उससे जुड़े आवश्यक घटक उपलब्ध कराए जा सकेंगे.

ट्रामा और गंभीर मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ

एम्स प्रशासन के अनुसार यह ब्लड बैंक ट्रामा, न्यूरो सर्जरी, हार्ट सर्जरी, सड़क दुर्घटना और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा. अक्सर आपातकालीन स्थितियों में रक्त की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन जाती है, लेकिन इस सुविधा के शुरू होने से ऐसे मरीजों को त्वरित सहायता मिल सकेगी. इसके अलावा थैलेसीमिया जैसे रोगों से पीड़ित मरीजों को भी नियमित रूप से रक्त उपलब्ध कराने में यह ब्लड बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

आधुनिक तकनीक से लैस है ब्लड बैंक

देवघर एम्स का यह ब्लड बैंक ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन तकनीक से सुसज्जित है. इस तकनीक की मदद से एक यूनिट रक्त को विभिन्न घटकों जैसे प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और अन्य आवश्यक तत्वों में अलग किया जा सकता है. इससे एक ही यूनिट रक्त का उपयोग कई मरीजों के उपचार में किया जा सकेगा. विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था रक्त की बर्बादी को रोकने में भी काफी प्रभावी साबित होगी. जरूरत के अनुसार मरीजों को केवल वही रक्त घटक उपलब्ध कराया जा सकेगा जिसकी उन्हें आवश्यकता है.

शुरुआत में 500 यूनिट, जल्द होगी 1000 यूनिट क्षमता

एम्स प्रबंधन ने बताया कि फिलहाल इस ब्लड बैंक में 500 यूनिट रक्त संग्रहित करने की व्यवस्था की गई है. हालांकि अगले कुछ महीनों के भीतर इसकी क्षमता बढ़ाकर 1,000 यूनिट तक कर दी जाएगी. इसके साथ ही हर वर्ष लगभग 10,000 यूनिट रक्त संग्रह करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके लिए नियमित रक्तदान शिविरों और जागरूकता कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा, ताकि ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में रक्त उपलब्ध रहे.

रिसर्च और चिकित्सा सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा

इस ब्लड बैंक की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे सीधे पैथोलॉजी लैब से जोड़ा गया है. इससे डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को विभिन्न बीमारियों पर अध्ययन और अनुसंधान करने में सुविधा मिलेगी. आधुनिक मशीनों की मदद से रक्त की गुणवत्ता की जांच, संरक्षण और वितरण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुरक्षित हो सकेगी. इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.

सांसद निशिकांत दुबे ने गिनाई उपलब्धियां

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने कहा कि संथाल परगना क्षेत्र में कुछ वर्ष पहले तक स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव था. उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से पहले इस क्षेत्र में एक्स-रे और एमआरआई जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सीमित थीं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर देवघर में एम्स की स्थापना हुई, जिससे पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि एम्स में ब्लड बैंक की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी. अब इसके शुरू होने से गंभीर और इमरजेंसी मरीजों को तत्काल राहत मिल सकेगी. साथ ही रक्त के विभिन्न घटकों की उपलब्धता के कारण अधिक मरीजों को बेहतर इलाज मिल पाएगा.

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क्षेत्र के लाखों लोगों को मिलेगी राहत

देवघर एम्स में अत्याधुनिक ब्लड बैंक की शुरुआत को स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. इससे झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों के लाखों लोगों को लाभ मिलेगा. कार्यक्रम में एम्स के निदेशक डॉ. नितिन गंगाने, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. इंद्रनील समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक और अधिकारी उपस्थित रहे. सभी ने इस सुविधा को क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देने वाला कदम बताया. आने वाले समय में यह ब्लड बैंक मरीजों के उपचार, शोध और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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