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Home झारखण्ड चतरा कोई बच्चों को दे रहे हैं शिक्षा, तो कोई पर्यावरण के प्रति हुए सजग

कोई बच्चों को दे रहे हैं शिक्षा, तो कोई पर्यावरण के प्रति हुए सजग

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कोई बच्चों को दे रहे हैं शिक्षा, तो कोई पर्यावरण के प्रति हुए सजग

चतरा. सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद जीवन में नया मोड़ आता है. अपनी दूसरी पारी की शुरुआत करते हुए व्यक्ति समाज के प्रति अपनी योगदान को देना नहीं भूलते हैं. कार्यकाल के दौरान व्यक्ति अपने परिवार, बच्चों की पढ़ाई, जीवन यापन की जिम्मेवारी निभाता है. लेकिन, रिटायर्ड होने के बाद अधिकांश लोग इस मौके को अवसर के रूप में लेते हैं. वे समाजसेवा, शिक्षा व धार्मिक कार्यों में खुद को व्यस्त रख अगले पड़ाव की ओर बढ़ते हैं. प्रस्तुत है रिपोर्ट:

धार्मिक कार्यो में व्यस्त रहते हैं कामता प्रसाद

जोरी निवासी कामता प्रसाद उपाध्याय 1961 में शिक्षक के पद पर नियुक्त हुए. 43 साल नौकरी करने के बाद 2004 में जोरी हाई स्कूल से वह सेवानिवृत हुए. फिलहाल वह समाजसेवा व धार्मिक कार्यो में हिस्सा ले रहे हैं. लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक कर रहे हैं. अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करते हैं.

सामाजिक कार्यों से जुड़े हैं बैधनाथ सिंह

जोरी निवासी बैधनाथ सिंह 1975 में सरकारी शिक्षक बने. 40 वर्षो तक सेवा देने के बाद 30 जून 2015 को कन्या मध्य विद्यालय जोरी से वह सेवानिवृत हुये. फिलहाल वह सामाजिक कार्यों से जुड़े हैं. खेतीबारी में खुद को व्यस्त रख रहे हैं. वहीं समाज के लोगों को खेतीबारी करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. लोगों से जुड़े रहते हैं.

पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रहे हैं कीर्तिनाथ सिंह

जोरी निवासी कीर्तिनाथ सिंह 1977 में सरकारी शिक्षक के रूप में योगदान दिया. 37 साल तक सेवा देने के बाद 2014 में आदर्श मध्य विद्यालय से वह सेवानिवृत हुए. वह फिलहाल पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रहे हैं. घर के आसपास पेड़-पौधों के साथ-साथ फूल लगाने व पेड़ों की रक्षा करने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करते हैं.

शिक्षा के महत्व को बता रहे हैं मो अब्दुल्लाह

जोरी के यहरा मुहल्ला निवासी मोहम्मद अब्दुल्लाह 1974 में सरकारी शिक्षक बने. 40 वर्षो तक सेवा देने के बाद 30 नवंबर 2014 में उत्क्रमित मध्य विद्यालय पोस्तिया से सेवानिवृत हुये. फिलहाल वे सामाजिक कार्यों से जुड़े हैं. समाज व गांव के लोगों को शिक्षा के महत्व को बता बच्चों को नियमित स्कूल जाने के लिए प्रेरित करते हैं.

समाज को जागरूक कर रहे हैं सत्येंद्र कुमार

प्रतापपुर प्रखंड के अनंतपुर के रहनेवाले सत्येंद्र कुमार 1994 में सरकार शिक्षक बने. 28 वर्ष तक सेवा देने के बाद 2022 में प्रतापपुर के यूएमएस कल्याणपुर से सेवानिवृत्त हुए. फिलहाल वे समाज को जागरूक कर रहे हैं. नशा की रोकथाम, दहेज प्रथा समाप्त समेत अन्य कुरीतियों व शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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