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Home झारखण्ड चतरा सीसीएल की चंद्रगुप्त कोल परियोजना से कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन, क्षेत्र में बढ़ेगा रोजगार

सीसीएल की चंद्रगुप्त कोल परियोजना से कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन, क्षेत्र में बढ़ेगा रोजगार

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सीसीएल की चंद्रगुप्त कोल परियोजना से कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन, क्षेत्र में बढ़ेगा रोजगार
आम्रपाली चंद्रगुप्त के जीएम संजीव कुमार (बाएं) और पीओ भूषण कुमार. फोटो: प्रभात खबर

टंडवा से वरुण सिंह की रिपोर्ट

झारखंड के चतरा जिले के टंडवा स्थित सीसीएल की बहुप्रतीक्षित चंद्रगुप्त कोल परियोजना से आखिरकार कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है. पिछले शनिवार से उत्पादन शुरू होने के साथ ही सीसीएल और आसपास के क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है. इस परियोजना को क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है.

ओबी खनन के एक महीने बाद मिली सफलता

परियोजना में 17 फरवरी से ओवरबर्डन (ओबी) खनन का कार्य शुरू किया गया था. इसके ठीक एक महीने बाद 21 मार्च से कोयला उत्पादन शुरू कर दिया गया. इतनी कम अवधि में उत्पादन शुरू होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. फिलहाल कोयले का डिस्पैच शुरू नहीं हुआ है, इसलिए उत्पादित कोयले को स्टॉक में रखा जा रहा है.

शुरुआती उत्पादन और भविष्य की बड़ी योजना

अब तक परियोजना में करीब 9 लाख क्यूबिक मीटर ओबी हटाया जा चुका है. शुरुआती दौर में प्रतिदिन लगभग 18 हजार टन कोयले का उत्पादन किया जा रहा है. नए वित्तीय वर्ष में इस परियोजना से 4.5 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. भविष्य में इस परियोजना को और विस्तार देते हुए 15 मिलियन टन उत्पादन क्षमता तक पहुंचाने की योजना है, जो इसे सीसीएल की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल करेगा.

विशाल क्षेत्र में फैली है परियोजना

चंद्रगुप्त कोल परियोजना करीब 3331 एकड़ भूमि में फैली हुई है. इस क्षेत्र में अनुमानित 527 मिलियन टन कोयले का भंडार मौजूद है. परियोजना की कुल अवधि 41 वर्षों की तय की गई है. वर्तमान में 25 वर्षों के लिए एमडीओ (माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर) मोड में सुसी माइनिंग कंपनी को ठेका दिया गया है. यह कंपनी परियोजना के संचालन और विकास में अहम भूमिका निभा रही है.

कई गांवों की जमीन शामिल, स्थानीय सहयोग अहम

इस परियोजना के लिए टंडवा और केरेडारी अंचल के कई गांवों की जमीन ली गई है. इसमें चट्टी बरियातू, जोरदाग, नवाखाप, पचड़ा, सिझुआ, बुकरु और उड़सु जैसे गांव शामिल हैं. ग्रामीणों के सहयोग से ही इस परियोजना को गति मिली है. स्थानीय लोगों की भागीदारी और समर्थन को परियोजना की सफलता का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है.

रोजगार के नए अवसरों का सृजन

परियोजना शुरू होने से क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं. स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से काम मिलने लगा है, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है. सीसीएल प्रबंधन का मानना है कि आने वाले समय में यह परियोजना रोजगार और विकास का बड़ा केंद्र बनेगी.

जीएम, पीओ और मैनेजर की टीम ने रचा इतिहास

ओबी खनन शुरू होने के महज एक महीने के भीतर कोयला उत्पादन शुरू कर नवनियुक्त जीएम संजीव कुमार, पीओ भूषण कुमार और मैनेजर विवेक कुमार की टीम ने एक नया रिकॉर्ड कायम किया है. इस उपलब्धि की चर्चा सीसीएल मुख्यालय दरभंगा हाउस तक पहुंच गई है. जीएम संजीव कुमार ने बताया कि इस परियोजना के शुरू होने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है और उन्होंने रैयतों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया. वहीं पीओ भूषण कुमार ने कहा कि सहकर्मियों और रैयतों के सामूहिक प्रयास से यह सफलता संभव हो सकी है.

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विकास की दिशा में बड़ा कदम

चंद्रगुप्त कोल परियोजना का संचालन शुरू होना न केवल सीसीएल के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. यह परियोजना आने वाले वर्षों में ऊर्जा उत्पादन, रोजगार और आर्थिक विकास को नई दिशा देगी. इससे यह स्पष्ट है कि झारखंड के खनन क्षेत्र में विकास की रफ्तार लगातार तेज हो रही है और चंदगुप्त परियोजना इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरी है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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