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Home झारखण्ड चाईबासा Chaibasa News : तीन राज्यों की टीम का इंटर-स्टेट रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू, शाम में सीमा पार हुआ हाथी, रात में लौटा

Chaibasa News : तीन राज्यों की टीम का इंटर-स्टेट रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू, शाम में सीमा पार हुआ हाथी, रात में लौटा

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Chaibasa News : तीन राज्यों की टीम का इंटर-स्टेट रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू, शाम में सीमा पार हुआ हाथी, रात में लौटा

जगन्नाथपुर. जिले में हाथी से मचे कोहराम के बाद वन विभाग ने अब तक का सबसे बड़ा इंटर-स्टेट रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है. शाम को हाथी ओडिशा सीमा पार हो गया. वहीं, रात को ओडिशा से खदेड़े जाने पर वापस लौटने लगा था. इस अभियान को और अधिक मजबूती देने के लिए रांची से क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (आरसीसीएफ) स्मिता पंकज खुद मझगांव के तिलोकुटी पहुंचीं. उनकी उपस्थिति में पूरे ऑपरेशन की रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा. प्रशासन ने 8 जेसीबी मशीन चार ट्रैक्टर की मदद ली.

रांची से पहुंचे कई पदाधिकारी, फूंक-फूंक कर रख रहे कदम :

वन विभाग की टीम की रणनीति की रूपरेखा देने के लिए रांची से कई पदाधिकारी मझगांव के बेनीसागर पहुंचे थे. सारंडा के अनुरूप सिन्हा और चाईबासा के डीएफओ आदित्य नारायण के साथ दो अन्य डीएफओ स्वयं नेतृत्व कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि वे हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं, ताकि ऑपरेशन के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो. लोगों का कहना है कि टीम ने अंधेरा होने से पहले प्रयास किया होता, तो शायद रणनीति सफल हो सकती थी. इस संबंध में पदाधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नही थे.

बिना नुकसान हाथी को खदेड़ने का लक्ष्य :

हालांकि, वन विभाग का लक्ष्य है कि हाथी को बिना किसी शारीरिक नुकसान के ट्रैंकुलाइज (बेहोश) कर सुरक्षित रूप से घने जंगल में खदेड़ना है. इस कदम से क्षेत्र के ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित होगी.

ग्रामीणों को भय, रात होते ही फिर आतंक मचायेगा हाथी :

हाथी के उत्पात को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है. ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते यदि हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा जाता, तो हालात इतने भयावह नहीं होते. लोगों का कहना है कि जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ेगा, हाथी की सक्रियता और ताकत और अधिक बढ़ जायेगी, जिससे उसे काबू में करना और मुश्किल हो जाएगा. इससे आसपास के गांवों में जान-माल के नुकसान की आशंका और बढ़ गयी है.

12 घंटे तिलोकुटी में जमा रहा हाथी, गुरुवार रात में 27 किमी चला :

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डुमरिया क्षेत्र में गुरुवार शाम 5 बजे टेलिंगबुरु जंगल में हाथी दिखा था. इसके बाद हाथी ने रात भर में लगभग 25 किलोमीटर की दूरी तय की. जानकारी के अनुसार, हाथी रात 9 बजे कुसमिता, 10 बजे कुसमुंडा, 11बजे गुड़गांव में रहा. उसके बाद हाथी हैप्पलबुरु के जंगलों से गुजरते हुए देर रात हल्दिया क्षेत्र में दाखिल हुआ. शुक्रवार सुबह 6 बजे हाथी तिलकुटी पहुंच गया. उसने अगले 12 घंटों तक डेरा जमाये रखा. दिन भर हाथी की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल रहा.

48 घंटे बाद फिर आक्रामक हुआ हाथी, अबतक 12 जगहों पर कर चुका है हमला, निर्दोष ग्रामीणों की जा रही जान

चाईबासा. पश्चिमी सिंहभूम जिले में करीब 48 घंटे (बुधवार सुबह से शुक्रवार सुबह) शांत रहने के बाद हाथी फिर आक्रामक हो गया. हाथी ने मझगांव में दो ग्रामीणों व एक वनकर्मी को मार डाला. दो दांत का हाथी अब तक जिले में 12 अलग-अलग जगहों पर हमला कर चुका है. इसमें 20 लोगों की मौत व करीब 15 लोग घायल हुए हैं. एक जनवरी से यह हाथी लगातार रिहायशी इलाकों में घुसकर रात के समय लोगों पर हमला कर रहा है. अधिकतर घटनाएं तब हुईं, जब लोग अपने घरों में सो रहे थे. गुरुवार को कोई जनहानि नहीं हुई थी.

ग्रामीणों से अलग-अलग सूचना मिलने से परेशान दिखी टीम :

हालांकि, गुरुवार देर रात‎ गुजरात स्थित वनतारा के ‎हाथी एक्सपर्ट को लेकर‎ डीएफओ आदित्य‎ नारायण हाटगम्हरिया पहुंचे. हाथी‎ के बारे में ग्रामीण अलग-‎अलग सूचनाएं देते रहे. इससे टीम को थोड़ी परेशानी हुई. इसके ‎सत्यापन के लिए रातभर‎ मशाल लेकर टीम घूमती रही.

पीसीसीएफ व आरसीसीएफ पहुंचे चाईबासा, क्विक रिस्पांस टीम अलर्ट :

झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) आशुतोष उपाध्याय और क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (आरसीसीएफ) स्मिता पंकज ने चाईबासा पहुंचकर प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. अधिकारियों ने वनकर्मियों के साथ बैठक की. क्विक रिस्पांस टीम को सक्रिय रखने और वन सुरक्षा समितियों को अलर्ट मोड में रखने के निर्देश दिये हैं. वन विभाग ने बताया कि जैसे ही हाथी की सटीक लोकेशन मिलेगी, उसे तत्काल ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाएगा. वहीं, ग्रामीणों ने रात में गश्ती बढ़ाने व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी और की जान न जाये.

गांवों में खेती-किसानी व मजदूरी प्रभावित :

ग्रामीणों का कहना है कि जान-माल की सुरक्षा पर कोई प्रभावी और स्थायी सरकारी पहल अब तक नजर नहीं आ रही है. लोग रात के समय घर से बाहर निकलने में डर रहे हैं. खेती-किसानी, मजदूरी और दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो चुका है. हाथियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने, हाथी कॉरिडोर की पहचान करने, सोलर फेंसिंग, ट्रेंच, लाइट एवं सायरन जैसी व्यवस्था लागू करने तथा संवेदनशील गांवों में तत्काल सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग रखी है.

काल बनकर घूम रहा हाथी हम घरों में कैद हैं : ग्रामीण

झींकपानी. यमराज बनकर घूम रहे हाथी से ग्रामीण दहशत में हैं. टोंटो प्रखंड के सात गांवों के ग्रामीणों व मुंडाओं ने शुक्रवार को बैठक की. हेस्सा सुरुनिया की अध्यक्षता में फसल सुरक्षा को लेकर चर्चा हुई. बैठक में कुचिया, सालीकुटी, केंजरा, सुंडी सुरनिया, दुनडुचू, बानडीजारी और हेस्सा सुरनिया के ग्रामीण शामिल हुए. ग्रामीणों ने कहा कि हाथी हमारे लिए काल बन गया है. शाम होते डर से घरों में दुबक जाना पड़ता है. टोंटो प्रखंड के कई गांवों में हाथी ने दर्जनों घर तोड़ा है. वहीं, बांडीजारी व बीरसिंहहातू में वर्ष के प्रथम दिन दो लोगों को हाथी ने कुचल कर मार दिया.

हाथियों पर निगरानी के लिए वाच टावर लगाने की मांग :

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हमारी सुरक्षा के लिए वन विभाग से कुछ नहीं किया जा रहा है. विभिन्न मांगों पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया. ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की, जगह चिह्नित कर हाथियों की निगरानी के लिए वाच टावर लगाया जाये. झटका प्रोजेक्ट स्थापित किया जाये. पदस्थापित वनकर्मी अपने अपने डयूटी क्षेत्र में नियमित रूप से उपस्थित रहें. वन विभाग नियमित पेट्रोलिंग व समस्या का स्थायी समाधान करे. हाथियों से होने वाले नुकसान का मुआवजा के लिए कैंप लगा कर फॉर्म भरने का काम हो.

चिपरी हेंब्रम के परिजनों को मिली आर्थिक मदद

हाटगम्हरिया. हाटगम्हरिया प्रखंड के सिलजोड़ा गांव में बुधवार को हाथी के हमले में मृत चिपरी हेंब्रम के परिजनों को शुक्रवार को आर्थिक सहायता प्रदान की गयी. मंत्री दीपक बिरुवा के निर्देश पर झामुमो कार्यकर्ताओं ने मृतका के पति रुतकु हेंब्रम व घायल के परिजनों को सहायता राशि दी. मौके पर मुखिया गोपाल हेंब्रम, जिला परिषद सदस्य प्रमिला पिंगुवा व झामुमो जिला उपाध्यक्ष विकास गुप्ता मौजूद रहे.

विधायक ने पीड़ित परिवारों को राशन दिया, हर संभव मदद का आश्वासन

नोवामुंडी. नोवामुंडी प्रखंड की जेटेया पंचायत स्थित बावड़िया मुंडा टोला और बड़ापसिया टोला, डुगुडबासा में मातम पसरा हुआ है. शुक्रवार को विधायक सोनाराम सिंकु के निर्देश पर एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवारों से मिला. शोक संतप्त परिजनों से मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की. उन्हें भरोसा दिलाया कि इस कठिन समय में विधायक और पूरी टीम उनके साथ मजबूती से खड़ी है. पीड़ित परिवारों को राशन सामग्री उपलब्ध करायी. मृतकों के बच्चों की शिक्षा और भविष्य को लेकर हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया.

हाथी को देखने दूसरे गांव से पहुंचा ग्रामीण हो गया शिकार

हाथी हल्दिया से सुबह 6 बजे तिलोकुटी पहुंचा. हाथी के पीछे कुछ बच्चे व लोग हल्दिया से तिलोकुटी पहुंच गये. इस दौरीन 7 बजे हाथी ने दामोदर कुल्डी नामक बच्चे को मार डाला. वहीं, बेनीसागर निवासी प्रकाश दास उस मृत बच्चे को देखने गया था. वह हाथी का शिकार हो गया. जिसके बाद लोगों ने वन विभाग को सूचित किया. सूचना पाकर वन विभाग की टीम घटना स्थल पर रात 9 बजे पहुंची. इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी सहित वन विभाग के अलग अलग डीएफओ तथा अन्य अधिकारी 11 बजे पहुंचे.

हिंसक हाथी ने 200 साल पहले के ‘पीर बक्स’ की याद दिलायी

गोइलकेरा. अब तक 20 लोगों को अपना शिकार बना चुका हिंसक हाथी ने 19वीं सदी में ब्रिटिशकालीन साम्राज्य में पीर बक्स हाथी की याद दिला दी है. उस समय मद्रास रेसिडेंसी में पीर बक्स नामक बुल हाथी ने करीब 20 लोगों की जान ली थी. पीर बक्स हाथी करीब 9 फीट का था. उक्त हाथी को भारी समान खींचने के लिए रखा गया था. हाथी अपने हार्मोनल अवस्था में मस्त कहा जाता हैं. पीर बक्स के साथ यही हुआ था. उसका नियमित महावत अनुपस्थित था. नया महावत उसे बेरहमी से मारपीट करने लगा. इसके बाद पीर बक्स ने जंजीर तोड़कर महावत को पटककर मार दिया था. इसके बाद एक-एक कर 20 ग्रामीणों को मार डाला था. स्पोर्ट एंड एडवेंचर इन दी इंडियन जंगल नामक किताब में पीर बक्स का जिक्र मिलता है.

गोइलकेरा : कोरोना काल से ज्यादा डरे हुए हैं जंगल से सटे गांवों के लोग

गोइलकेरा. कोल्हान समेत कई इलाकों में हाथी के भय से शाम पांच बजे के बाद अघोषित कर्फ्यू लग जा रही है. लोग घरों में दुबक जा रहे हैं. सड़कें वीरान हो जा रही है. कामकाजी लोग अंधेरा होने से पहले घर को लौट रहे हैं. इतनी दहशत ग्रामीणों में कोरोना के वक्त नहीं थी. कोल्हान क्षेत्र अंतर्गत कटकरा, लाजोरा, बुरुहुंदरु, सर्बिल, कुला, रघुनाथपुर, शिपुवा, बिला, झीलरवां, पाटुग, आराहसा, कुरकुटिया गांव में लोग की नींद उड़ गयी है. इन क्षेत्रों में वन कर्मी रात में घूमकर ग्रामीणों के बीच पटाखे बांट रहे हैं. लोगों से अपील की जा रहा है कि अफवाह से बचें और सुरक्षित रहें.

भोजन-पानी के लिए गांवों में घुस रहे हाथी

झींकपानी. पश्चिमी सिंहभूम जिला में यमराज बनकर घूम रहे अकेला हाथी से गांवों में गमगीन माहौल है. लोगों की रातों की नींद व दिन का चैन उड़ गया है. हाथी का इस तरह खूंखार होने के पीछे का कारण हर कोई अपने-अपने तरह से बता रहा है. इसके लिए वन विभाग व सरकार के साथ मानव द्वारा अंधाधुंध जंगलों की कटाई भी एक कारण है. वन विभाग व सरकार की उदासीनता के कारण वनों की अंधाधुंध कटाई से वन सिमटते जा रहे हैं. घटते जंगल के कारण भोजन की तलाश में गांवों में हाथी घुस रहे हैं. मानव व हाथियों में टकराव होने से जान माल का नुकसान हो रहा है. वन विभाग द्वारा वनों की वृद्धि के लिए करोड़ों खर्च किये जा रहे हैं, लेकिन जंगल बढ़ने के बजाय घटते जा रहे हैं. हाथियों के गांवों की ओर रुख करने के पीछे सबसे बड़ा कारण जंगलों का खत्म होना और पानी के स्रोतों का सूख जाना भी है. गौरतलब हो कि जंगल क्षेत्र में अवैध खनन के कारण हाथी जंगल से बाहर निकल आये हैं. कोल्हान व सारंडा के जंगलों में माओवादियों द्वारा बिछाये गये आइइडी के कारण भी हाथियों को जंगल से बाहर निकलना पड़ रहा है. हाथी भोजन की तलाश में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. फसलों की रक्षा के लिए चारों दिशाओं से हाथियों को खदेड़ा जा रहा है. परिणाम स्वरूप हाथी हिंसक होकर इंसानों पर हमला करने लगे हैं. वन विभाग व सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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