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Home झारखण्ड चाईबासा पश्चिमी सिंहभूम : शाम होते ही घरों में कैद हो जाते हैं पुखरीबुरु के लोग

पश्चिमी सिंहभूम : शाम होते ही घरों में कैद हो जाते हैं पुखरीबुरु के लोग

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पश्चिमी सिंहभूम : शाम होते ही घरों में कैद हो जाते हैं पुखरीबुरु के लोग

चाईबासा. पश्चिमी सिंहभूम जिले का टोंटो प्रखंड में सुविधाओं का टोटा है. लोग बुनियादी सुविधाओं (बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा व स्वास्थ्य) के लिये तरसते हैं. प्रखंड मुख्यालय से करीब 12 किमी दूर करीब 80 घरों व 600 आबादी वाले पुखरीबुरु गांव में छह साल से बिजली नहीं है. जंगल से सटे इस गांव में शाम होते ही अंधेरा पसर जाता है. महिलाएं दिन में भोजन बना लेती हैं. शाम होने से पहले ग्रामीण भोजन कर घरों में कैद हो जाते हैं. बच्चे शाम को पढ़ाई नहीं कर पाते हैं.

गांव में लगा सोलर प्लांट एक माह में हुआ खराब, बिजली के तरस रहे कई

गांव में वर्ष 2018 में सोलर प्लांट लगाया गया था, लेकिन एक माह बाद खराब हो गया. अब सोलर पैनल शोभा की वस्तु बनकर रह गया है. इसे दुरुस्त करने के लिये कोशिश नहीं की गयी. ग्रामीण ढिबरी युग में जी रहे हैं. ग्रामीणों ने सोलर पैनल दुरुस्त कराने के लिये जनप्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा था.

सरकार से नहीं मिल रहा केरोसिन, ग्रामीण खरीदने में असक्षम

ग्रामीण बताते हैं कि गांव में बिजली का खंभा तक नहीं लग पाया है. वहीं, बुंडूबांकी में बिजली नहीं पहुंच पायी है. लोगों को ढिबरी जलानी पड़ती है. केरोसिन महंगा होने के कारण ग्रामीण खरीद नहीं पाते हैं. आठ किमी दूर रुतागुटू गांव की राशन दुकान में केरोसिन नहीं मिलता है. इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.

लोगों के घरों में आने से कतराते हैं मेहमान

गांव में बिजली की सुविधा नहीं होने से लोगों के घरों में मेहमान आने से कतराते हैं. ऐसे में लोगों के घरों में पर्व-त्योहार होने पर मेहमानों की कमी खलती है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर मेहमान आते हैं, तो शाम होने से पहले लौट जाते हैं. वहीं, गांव के युवक व युवतियों के विवाह में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

राशन लाने आठ किमी पैदल जाते हैं ग्रामीण

ग्रामीणों के पास राशन कार्ड हैं, लेकिन आठ किमी पैदल जाकर अनाज लेना पड़ता है. इसमें सात किमी कच्चा और उबड़- खाबड़ रास्ता है. बच्चों के लिये गांव में एक प्राइमरी स्कूल है. हालांकि, शाम के बाद बच्चे पढ़ नहीं पाते हैं.

शाम होते ही घरों में कैद हो जाते हैं पुखरीबुरु के लोग

राजेन तुबिद ने कहा कि पुखरीबुरु गांव में बिजली नहीं है. जंगल से सटे होने के कारण जंगली जानवरों का भय रहता है. गांव का सोलर प्लेट करीब छह साल से खराब है. शाम होते ही लोग घर में कैद हो जाते हैं. चोकरो सिद्दू ने कहा कि रात में किसी मरीज को अस्पताल ले जाने में भारी दिक्कत होती है. लालटेन भी नहीं मिल पाता है. सरकार को चाहिये कि गांव में बिजली बहाल करने की मुकम्मल व्यवस्था कराये. आनंद तुबिद ने कहा कि टोंटो प्रखंड के कई गांव में बिजली नहीं है. पुखरीबुरु गांव में शाम होते ही अंधेरा पसर जाता है. लोग घरों में दुबक जाते हैं. गांव में प्राइमरी स्कूल है, लेकिन बिजली के अभाव पढ़ नहीं पाते हैं. गुरु नागुरी ने कहा कि पुखरीबुरु गांव में छह साल से बिजली नहीं होने के कारण मेहमान भी आने से कतराते हैं. यदि मेहमान आता है, तो शाम से पहले लौट जाता है. आठ किमी दूर से राशन लाते हैं. केरोसिन नहीं मिल रहा.

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