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Home झारखण्ड चाईबासा Chaibasa News : कभी अभिशाप रही चूना खदान, अब ग्रामीणों की एटीएम बनी

Chaibasa News : कभी अभिशाप रही चूना खदान, अब ग्रामीणों की एटीएम बनी

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Chaibasa News : कभी अभिशाप रही चूना खदान, अब ग्रामीणों की एटीएम बनी

चाईबासा.

चाईबासा के कमारहातु में चूना पत्थर की बंद खदान करीब 300 फीट गहरी है. यह कभी क्षेत्र के लोगों के लिए किसी अभिशाप माना जाता था. मकतमहातु पंचायत के लोगों ने आपसी सामंजस्य से बंद खदान को आय के स्रोत का बना दिया. यह पिकनिक स्पॉट बनता जा रहा है. इस खदान की गहराई ज्यादा होने के कारण आसपास के क्षेत्र का जल स्तर काफी घट गया था. करीब दो किमी के क्षेत्र में पेयजल की किल्लत होने लगी थी. लोगों के घरों के नलकूप से लेकर बोरिंग तक फेल हो रहे थे. इस खदान के पास लोग जाने से कतराते थे. अब यह खूबसूरत तालाब का रूप ले चुका है. यहां चूना पत्थर के टुकड़ों की जगह लबालब पानी भर गया है. यहां मछली पालन से लेकर बोटिंग तक सुविधा उपलब्ध है. ग्रामीणों ने मत्स्यजीवी सहयोग समिति बना रखा है. इससे कुल 52 परिवार लाभान्वित है. लगन और अथक प्रयास के दम पर समिति अब लखटकिया समिति बन गयी है.

समिति मछली बेचकर बनी लखपति

समिति के संरक्षक मुखिया जुलियाना देवगम, पंचायत समिति सदस्य दीनबंधु देवगम व ग्राम मुंडा बिरसा देवगम जुड़े हैं. वहीं सहकारिता से जुड़कर समिति का अपना अलग बैंक खाता है. अब समिति मछली बेचकर लखपति बन चुकी है. समिति के सदस्य आवश्यकता के अनुसार एक-दूसरे को सहयोग करते हैं. मछली उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर जिला मत्स्य पदाधिकारी समिति को उचित मार्गदर्शन देते हैं.

पलायन रोकने में मिली मदद, स्वरोजगार मिला

पलायन जैसी गंभीर समस्या से छुटकारा पाने के उद्देश्य से मछली पालन शुरू किया गया था. इसमें तत्कालीन उपायुक्त अनन्य मित्तल, जिला मत्स्य पदाधिकारी जयंत रंजन के रोजगार सृजन की सोच छिपी है. मुखिया जुलियाना देवगम की अगुवाई में स्थानीय पंचायत जनप्रतिनिधियों की मांग पर मत्स्य पालन की योजना को अमलीजामा पहनाया गया.

खदान बंद होते ही पलायन करने लगे थे लोग

विदित हो कि 1970 के दशक से स्थानीय उद्योगपति चूना पत्थर का खनन करते थे. इस खदान में काम करने वाले कई परिवार के बेटे भारतीय सैनिक और पुलिस की नौकरी में चले गये. खदान बंद होने के बाद मजदूर परिवार असहज महसूस करने लगे थे. गांव के युवा बेरोजगार काम की तलाश में राज्य से बाहर जाने लगे.

गांव के बुद्धिजीवियों ने की पहल

ऐसे में गांव के बुद्धिजीवी वर्ग विशेषकर शिक्षक कृष्णा देवगम, सार्जेंट मेजर रांधो देवगम, पूर्व मुंडा दीनबंधु देवगम, सिविल कोर्ट से सेवानिवृत्त प्रधान लिपिक सोमय देवगम,मुंडा बिरसा देवगम, पूर्व सैनिक कैप्टन भीम सिंह देवगम, सीआइएसएफ इंस्पेक्टर सोनाराम देवगम, बार्क मुम्बई के वैज्ञानिक सहायक पाइकिराय देवगम, सेवानिवृत्त रेलवे इंजीनियर सामु देवगम आदि ने खदान तालाब को कृषि कार्य या मछली पालन के लिए उपयोग करने की सोची.

चांडिल डैम से मिली मत्स्य पालन की प्रेरणा

खदान ज्यादा काफी गहरा होने के कारण मछली पालन असंभव लग रहा था. इस बीच पंचायत चुनाव में गांव की बहू जुलियाना देवगम मुखिया चुनी गयीं. मुखिया के जेहन में बुद्धिजीवियों द्वारा खदान तालाब में मछली पालन की बात याद आयी. चूंकि, वह महिला समूह के साथ चांडिल डैम का भ्रमण कर चुकी थीं. वहां उन्होंने केज सिस्टम से संचालित मत्स्य पालन कार्य देखा था. इसी तर्ज पर खदान तालाब में केज सिस्टम से मत्स्य पालन कार्य की योजना लेकर तत्कालीन उपायुक्त अनन्य मित्तल को ज्ञापन सौंपा. उपायुक्त ने केज सिस्टम द्वारा मत्स्य पालन कार्य आरंभ करने का निर्देश तत्काल जिला मत्स्य पदाधिकारी को दिया.

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