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Home झारखण्ड चाईबासा Chaibasa News : बावड़िया में एक साथ दफनाये गये चारों शव, बेसुध खड़ा रहा अनाथ जयपाल

Chaibasa News : बावड़िया में एक साथ दफनाये गये चारों शव, बेसुध खड़ा रहा अनाथ जयपाल

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Chaibasa News : बावड़िया में एक साथ दफनाये गये चारों शव, बेसुध खड़ा रहा अनाथ जयपाल

नोवामुंडी. नोवामुंडी प्रखंड की जेटेया पंचायत स्थित बावड़िया गांव में मंगलवार की रात हाथी के हमले में मारे गये एक परिवार के चार सदस्यों (पति, पत्नी, बेटा व बेटी) के शवों पोस्टमार्टम के बाद बुधवार को अंतिम संस्कार हुआ. गांव में चारों शव पहुंचते ही ग्रामीणों की आंखें छलक गयीं. जेसीबी की मदद से बड़ा गड्ढा खोदकर चारों शवों को एक साथ दफनाया गया. वहीं, अनाथ 13 वर्षीय जयपाल बेसुध हालत में माता-पिता व भाई-बहन के अंतिम संस्कार को देखता रहा. दरअसल, जयपाल ने घटना की रात पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचायी थी. उसकी आंखों के सामने हाथी ने माता-पिता व भाई-बहन को दौड़ाकर मार डाला था. ज्ञात हो कि पुआल की झोपड़ी में सो रहे सनातन मेराएल, पत्नी झोलको कुई, बेटी दमयंती मेराल और बेटा मुगडू को हाथी ने मार डाला था.

डर से घर नहीं जा रहे बच्चे, मामा ने संभाला:

अनाथ हुए बच्चों के मामा टुप्रा लागुरी ने बताया कि घटना के बाद बच्चे इतने डर गये हैं कि अपने घर नहीं जा रहे हैं. बुधवार की रात मेरे साथ मेरे घर पर ही सोये थे. बच्चे बार-बार रोते हैं. हाथी का नाम सुनते ही घबरा जाते हैं. घटना के बाद से जयपाल की हालत ठीक नहीं है. लोगों ने बताया कि बच्चा अब भी सदमे में है. बार-बार डर से चौंक जा रहा है.

हाथी का खौफ, कई परिवार ने घरों में सोना छोड़ा:

घटना के बाद से पूरे गांव में हाथी का खौफ है. कई परिवारों ने रात में अपने घरों में सोना छोड़ दिया है. ग्रामीण रात में एकजुट होकर पहरा दे रहे हैं. वहीं, महिलाएं व बच्चे सामूहिक रूप से रह रहे हैं. एक ही रात में पूरे परिवार के खत्म होने, बच्चों के अनाथ होने और हाथी के डर के चलते पूरे गांव में गहरा मातम और भय का माहौल है.

विभाग ने ग्रामीणों को पटाखा दिये:

ग्रामीणों ने वन विभाग से पटाखे और टॉर्च की मांग की है, ताकि हाथी को भगाने में मदद मिल सके. वन विभाग ने तुरंत कुछ लोगों को पटाखा उपलब्ध कराया है. वहीं, बाकी को जल्द प्रदान करने की बात कही.

चारों मृतकों के प्रमाण पत्र परिजनों को सौंपा:

नोवामुंडी के बीडीओ पप्पू रजक और सीओ मनोज कुमार पीड़ित परिवार व गांव की स्थिति पर लगातार नजर बनाये हुये हैं. दो दिनों के भीतर चारों मृतकों के मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन तैयार कर सौंप दिया गया.

अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी मामा को सौंपी गयी

जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरेन, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी रविंद्र कुमार सिंह देव और पंचायत सचिव माधव कंडोला की उपस्थिति में बच्चों के मामा टुप्रा लागुरी को सौंपा. गांव वालों की मौजूदगी में दोनों अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी मामा को दी.

मुआवजा, आवास व पढ़ाई का दिया गया भरोसा

जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरेंन ने बताया कि वन विभाग की ओर से चार मृतकों के लिए 80,000 रुपये तात्कालिक मुआवजा दिया गया है. बचे दोनों बच्चों की पारिवारिक सूची बनाकर शेष मुआवजा दिलाया जायेगा. बच्चों को आवास योजना का लाभ मिलेगा. स्कूल में नामांकन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी. इसके अलावा तीन बच्चों को कंबल वितरित किये गये.

गुरुचरण का शव देख मां व बहन टूटी, निहारता रहा अनाथ बच्चा

नोवामुंडी प्रखंड की जेटेया पंचायत स्थित बावड़िया गांव के उलीसाइ टोला में आंगन में पुआल के कुबां में सो रहे गुरुचरण लागुरी को हाथी ने मार डाला था. वहीं, गुरा मारिया और दो बच्चे हिंदू लागुरी व गोमया लागुरी को गंभीर रूप से घायल कर दिया था. दिव्यांग पांडू लागुरी ने छिपकर अपनी जान बचायी थी. पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार को गुरुचरण लागुरी का शव गांव में पहुंचा. यह देख उनकी मां जेमा कुई और दीदी जानु लागुरी बुरी तरह टूट गयीं. मासूम मोरान लागुरी का संसार उजड़ गया. मां-बाप का सहारा हमेशा के लिए खत्म हो गया. गुरुचरण का शव गांव से लगभग 1 किलोमीटर दूर आदिवासी रीति-रिवाज के अनुसार दफनाया गया. एक रात में गांव में तीन परिवार उजड़ गये.

जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरेन ने मृतक के परिवार की मां जेमा कुई को मृत्यु प्रमाण पत्र, कंबल और 5000 की आपात सहायता राशि प्रदान की. उन्होंने आश्वासन दिया कि परिवार को जल्द ही आवास योजना का लाभ मिलेगा. बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी.

बड़ापासेया : पति की मौत से गर्भवती पत्नी पर टूटा दुखों का पहाड़

नोवामुंडी के बड़ापासेया गांव में हाथी के हमले में मंगल बोबोंंगा की जान चली गयी. इससे पांच माह की गर्भवती उसकी पत्नी अंजु बोबोंंगा पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. गुरुवार को प्रखंड कल्याण पदाधिकारी रविंद्र सिंहदेव और जिप अध्यक्षा लक्ष्मी सुरेन ने अंजु को मृत्युप्रमाण पत्र और 3500 रुपये की सहायता राशि प्रदान की. यह राशि उस अपूरणीय क्षति के सामने जैसे बूंद बराबर भी नहीं है. गांव में हर कोई सोच रहा था कि अंजु और उसका अजन्मा बच्चा अब कैसे बिना पिता के इस दुनिया में रहेंगे. अंजु का हर दिन अब अपने पति की याद और उस दर्दनाक रात की यादों के साथ होगा. जो बच्चा अभी तक इस दुनिया को नहीं देख पाया, वह पिता के साये से पहले ही वंचित हो गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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