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Home झारखण्ड बोकारो World Environment Day: नौकरी छोड़ जंगल बचाओ अभियान से जुड़े जटलू, 11 सालों से पर्यावरण संरक्षण के लिए कर रहे काम

World Environment Day: नौकरी छोड़ जंगल बचाओ अभियान से जुड़े जटलू, 11 सालों से पर्यावरण संरक्षण के लिए कर रहे काम

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World Environment Day: नौकरी छोड़ जंगल बचाओ अभियान से जुड़े जटलू, 11 सालों से पर्यावरण संरक्षण के लिए कर रहे काम
Jatlu Mahto ( Environmentalist)

World Environment Day | ललपनिया, नागेश्वर: आज 5 जून को संपूर्ण विश्व पर्यावरण दिवस मना रहा है. जगह-जगह पौधारोपण किये जा रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण की ओर कदम बढ़ाने के लिए संकल्प लिए जा रहे हैं. लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का असर आज पहाड़ी छेत्रों में देखने को मिल रहा है. इसका प्रमुख कारण जंगलों में लगने वाली आग और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई है. हालांकि, कई ऐसे लोग भी हैं, जो प्रकृति को बचाने की मुहीम से जुड़े हैं. इन्हीं में से एक है, बोकारो के जटलू महतो, जो 11 सालों से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं.

11 साल से हैं सक्रिय

जानकारी के अनुसार, 59 वर्षीय जटलू महतो, बोकारो जिला के गोमिया प्रखंड अंतर्गत बड़की चिदरी पंचायत के कढमा गांव के रहने वाले हैं. जटलू नौकरी छोड़कर पिछले 11 सालों से जंगल बचाने की मुहिम से जुड़े हैं और पर्यावरणविद् के रूप में सक्रिय हैं. जटलू चतरोचटी थाना क्षेत्र के सात पंचायतों में काफी सजगता पूर्वक काम कर रहे हैं. इन्हें बचपन से ही पेड़-पौधों से जुड़ाव है और ये उनका बराबर ख्याल भी रखा करते हैं.

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इस तरह जंगल बचाओ अभियान से जुड़े

जटलू महतो छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में नीजी कंपनी में काम करते थे. जब साल 2014 में जटलू नौकरी छोड़कर घर वापस आये, तो यहां जंगल में जीव-जंतु से प्यार करते हुए पर्यावरण के साथ जंगल बचाओ मुहिम में जुड़ गये. इसी बीच उनकी मुलाकात चतरोचट्टी वन बीट के रेंजर सरजू यादव( अब सेवानिवृत्त)से हुई. रेंजर सरजू जटलू के काम से काफी खुश थे, इसलिए उन्होंने जटलू महतो को विभाग के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल कराया और उन्हें जंगल बचाओ अभियान में जोड़ा.

पर्यावरण संरक्षण में कर रहे काम

अपने काम के प्रति जटलू महतो की ईमानदारी से खुश होकर हजारीबाग पूर्वी वन प्रमंडल की पूर्व डीएफओ स्मिता पंकज और अपर मुख्य वन संरक्षक सजीव कुमार के द्वारा उन्हें कढमा में फंड आवंटित कर सामुदायिक भवन के साथ ही मिनी तेल मिल स्थापित कर दिया गया. जटलू महतो आज भी अपने काम के प्रति काफी सजग हैं. वे लगातार पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

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क्यों छोड़ी थी नौकरी

बताया गया कि जटलू महतो ने अपनी बेटी की वजह से नौकरी छोड़ी थी. साल 2014 में अचानक उनकी बड़ी बेटी की तबीयत खराब हो गई. ऐसे में उन्होंने कंपनी में बेटी के इलाज के लिए छुट्टी मांगी. लेकिन कंपनी ने उन्हें छुट्टी नहीं दी. इस पर जटलू ने कहा कि जब मेरी बेटी का इलाज ही नहीं होगा, तो फिर मेरी नौकरी कोई मायने नहीं रखती है. इसके बाद छुट्टी नहीं मिलने पर उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दिया और घर वापस आ गये.

दोबारा नहीं गये वापस

हालांकि, जटलू की बेटी बच नहीं सकी. कंपनी ने भी कहा कि नौकरी छोड़ने से उन्हें चार लाख का नुकसान होगा. इस पर जटलू ने कहा कि जब बेटी ही नहीं बची, तो पैसा कोई मायने नहीं रखता है. इसके बाद वे दोबारा नौकरी पर कभी नहीं लौटे. मालूम हो कि जटलू महतो के परिवार में 8 सदस्य हैं. लेकिन रोजगार के अभाव में उनके दो पुत्र प्रवासी मजदूर हैं. इनमें से बड़ा बेटा गुजरात और छोटा बेटा ओडिशा में गाड़ी चलाते हैं.

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वन विभाग देता है काम

जटलू ने कहा कि वर्तमान में वन विभाग द्वारा छोटा-मोटा काम मिल जाने पर कार्य करते हैं. इसके अलावा तेल मिल से यह कुछ आमदनी होने पर परिवार चलाने में मदद मिलती है. वो जंगल बचाओ और पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं. प्रभारी वन पाल रजा अहमद उन्हें वन बचाओ पर प्रेरित करते रहते हैं. निजी कंपनी में पर्यावरण पर 12 वर्षो तक काम करने के बाद वन विभाग ने उनके काम को देखकर उन्हें जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए यंत्र दिये गये हैं.

गांव-गांव घूमकर लोगों को प्रेरित करते हैं

जटलू जंगल में आग लगने पर अकेले भी वन बचाओ में जुट जाते हैं. इसके साथ ही वे वन को बचाये रखने और पर्यावरण शुद्ध रखने के लिए गांव-गांव में भ्रमण कर कार्यक्रम आयोजित करते हैं. इसके अलावा वन बचाने के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं. हर दिन एक निश्चित समय में जंगल क्षेत्र का भ्रमण करना जटलू का रुटिन है.

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