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संसार में जिसका आरंभ, उसका अंत भी : आचार्य विकासानंद

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संसार में जिसका आरंभ, उसका अंत भी : आचार्य विकासानंद

बोकारो. आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से आयोजित आनंद पूर्णिमा धर्म महासम्मेलन का दूसरा दिन शनिवार को आनंद नगर पुरुलिया में भक्तिमय माहौल में शुरू हुआ. शुरुआत प्रभात संगीत, बाबा नाम केवलम अखंड कीर्तन और सामूहिक ध्यान से हुई. मार्ग गुरु प्रतिनिधि, आचार्य विकासानंद अवधूत ने श्री श्री आनंदमूर्ति जी के मन दर्शन पर आध्यात्मिक प्रवचन दिया. आचार्य ने कहा कि किसी विशेष वस्तु का थोड़े समय तक आनंद लेने के बाद मन दूसरी वस्तु की ओर मुड़ना चाहता है. लेकिन संसार में जिसका आरंभ है, उसका अंत भी होता है. इसलिए किसी वस्तु का आप आनंद हमेशा नहीं उठा पाएंगे. मौत के लंबे हाथ उसे अवश्य छीन लेंगे. लोग इस बात को समझ नहीं पाते हैं. वे उन चीजों को सुखद मानते हैं जो कुछ समय तक उनके दिमाग में रहती हैं या जिनका वे धीरे-धीरे आनंद लेते हैं. उन्होंने कहा कि वह सूक्ष्म इकाई जिसके साथ हम हमेशा जुड़े रहते हैं, वह मन है. मन का आधार वह है जिसका हम चिंतन करते हैं, जिनको स्वीकार करते हैं या जिनका त्याग कर दिया गया है. ये वस्तुएं अपनी मूल अवस्था में बाहरी भौतिक वस्तुएं होती हैं. लेकिन इन वस्तुओं का मन पर आंतरिक प्रभाव पड़ता है. मन मानसिक रूप में ही आनंद लेता है. वहीं, संघ की सांस्कृतिक शाखा, पुनर्जागरण कलाकार और लेखक संघ (रावा) ने प्रभात संगीत पर आधारित सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया. मौके पर केंद्रीय जनसंपर्क सचिव आचार्य दिव्यचेतनानंद अवधूत व अन्य आनंदमार्गी मौजूद थे.

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