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दुगदा में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

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दुगदा में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

दुगदा. स्वामी विवेकानंद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय कर्माटांड़ में “भारतीय ज्ञान परंपरा, विकसित भारत की संकल्पना ” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन रविवार को हुआ. दूसरे दिन मुख्य अतिथि बहादुर शास्त्री, केंद्रीय विवि नयी दिल्ली के प्रो आरपी पाठक, विशिष्ट अतिथि लाल वीर बहादुर सिंह, पूर्वांचल विवि जौनपुर उत्तर प्रदेश के संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर अजय कुमार दूबे उपस्थित थे. प्रो पाठक ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा युवाओं में स्व चेतना व मानवीय मूल्यो का संवर्धन करती है. भारतीय ज्ञान परंपरा वैदिक साहित्य के आधार पर जीवंत बनी हुई है. वैदिक और सनातन साहित्य को विदेशी विद्वान भी श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं. भारतीय ज्ञान परंपरा में 64 कलाओं के आधार पर सौर ऊर्जा, आयुध निर्माण, रत्न विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, वायुयान, मौसम विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान, संचार विज्ञान, जल संरक्षण, जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, शल्य चिकित्सा, अर्थ विज्ञान, यंत्र विज्ञान, वाणिज्य, कृषि पशुपालन, रथयान, नक्काशी आदि अनेक विषयों की शिक्षा गुरुकुल में दी जाती थी. एनसीइआरटी नयी दिल्ली की डॉ नीता वर्मा ने कहा कि एक्यूप्रेशर, योग एवं हिलिंग विद्या भारतीय ज्ञान परंपरा में प्राचीन काल से सम्मिलित रहा है. कुटीर पीजी काॅलेज के डॉ सुरेंद्र दूबे, श्री राम कॉलेज जहानाबाद बिहार के डॉ अमित कुमार दूबे, पुरूलिया बंगाल के प्राचार्य डॉ दिनकर दीक्षित ने भी संबोधित किया. संगोष्ठी में अलग-अलग राज्यों के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया और सभी को प्रमाण पत्र दिया गया. सेमिनार का संचालन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ मनीष कुमार शुक्ला व धन्यवाद ज्ञापन प्रबंध निदेशक मुखलाल महतो ने किया.

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